देश की खबरें | रद्द किए गए अधिसूचित अपराधों के लिए धनशोधन अभियोजन जारी नहीं रखा जा सकता : दिल्ली उच्च न्यायालय
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नयी दिल्ली, 27 नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि धन शोधन के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी में अधिसूचित अपराध के लिए अभियोजन कार्यवाही को उस हालत में जारी नहीं रखा जा सकता है जब मामले में समझौता हो चुका हो और उसे खारिज किया जा चुका हो।
हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि उस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) को पूरी तरह से रद्द नहीं किया जा सकता है जब धन शोधन जांच के अस्तित्व को वैध बनाने के लिए कार्रवाई के समान कारण के संबंध में एक और प्राथमिकी दर्ज है।
उच्च न्यायालय का आदेश धनशोधन के एक आरोपी की याचिका पर आया, जिसमें उसने एक रियल एस्टेट परियोजना के विकास के लिए एकत्र किए गए धन की कथित हेराफेरी के संबंध में दिल्ली पुलिस की दो प्राथमिकियों के आधार पर उसके खिलाफ दर्ज ईसीआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
ईडी ने इस आधार पर याचिका का विरोध किया कि जांच के लंबित रहने के दौरान, पिछली प्राथमिकी के समान आरोपों के आधार पर एक तीसरी एफआईआर अस्तित्व में आई और इसे पहले से खोले गए ईसीआईआर में आगे की जांच के लिए रिकॉर्ड पर लिया गया था।
अदालत को सूचित किया गया कि कई शिकायतकर्ताओं ने अभी तक याचिकाकर्ता के साथ अपने विवाद का निपटारा नहीं किया है और 79 शिकायतें अब भी रेरा, उत्तर प्रदेश के समक्ष लंबित हैं।
न्यायमूर्ति अमित शर्मा ने हाल के एक फैसले में कहा कि विधेय अपराध की गैरमौजूदगी में धनशोधन का कोई अपराध नहीं हो सकता है, लेकिन वर्तमान मामले में, इस तथ्य के संबंध में कोई विवाद नहीं है कि इसके लिए तीसरी प्राथमिकी उसी परियोजना के लिये थी जो पिछली दो प्राथमिकियों का विषय था।
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