देश की खबरें | मोदी सरकार एक भी परीक्षा ठीक से नहीं करा पाई : असदुद्दीन ओवैसी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक भी परीक्षा ठीक से नहीं करा पाई। उन्होंने सरकार से यह भी जानना चाहा कि भविष्य में प्रश्नपत्र लीक होने से रोकने के लिए वह क्या कदम उठा रही है।
हैदराबाद, 20 जून ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक भी परीक्षा ठीक से नहीं करा पाई। उन्होंने सरकार से यह भी जानना चाहा कि भविष्य में प्रश्नपत्र लीक होने से रोकने के लिए वह क्या कदम उठा रही है।
ओवैसी का यह बयान शिक्षा मंत्रालय द्वारा यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने के एक दिन बाद आया है, क्योंकि ऐसी सूचनाएं मिली थीं कि परीक्षा की शुचिता से समझौता किया गया है।
हैदराबाद के सांसद ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नीट (राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा) घोटाले के बाद अब यूजीसी-नेट परीक्षा भी रद्द कर दी गई है, क्योंकि इसका प्रश्नपत्र लीक हो गया था। देश की सुरक्षा तो बड़ी बात है, मोदी सरकार एक भी परीक्षा ठीक से नहीं करा पाई।’’
ओवैसी ने प्रश्नपत्र लीक के 41 मामलों की ओर इशारा किया, जिसके कारण 15 राज्यों में नौकरियां चाहने वाले प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने पूछा, ‘‘कुल 1.4 करोड़ युवाओं को ये परीक्षाएं देनी थीं...क्या पेपर लीक होना नौकरी न देने का बहाना बन गया है?’’
एआईएमआईएम अध्यक्ष ने कहा कि जब परीक्षा रद्द होती है, तो युवाओं की मेहनत बेकार चली जाती है।
उन्होंने कहा कि अभ्यथियों को यह भी नहीं पता कि परीक्षा फिर कब होगी या होगी भी या नहीं। उन्होंने सवाल किया, ‘‘करीब 10 लाख लोगों ने यूजीसी-नेट की परीक्षा दी थी... क्या उन्हें मुआवजा दिया जाएगा? भविष्य में पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?’’
नीट परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बुधवार को यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया, क्योंकि ऐसी जानकारी मिली थी कि परीक्षा की शुचिता से समझौता किया गया है। साथ ही मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी।
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