सिलवासा, 25 अप्रैल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां नमो चिकित्सा शिक्षा एवं शोध संस्थान राष्ट्र को समर्पित किया और कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान जहां परियोजनाओं में देरी होती थी, वहीं उनकी सरकार ने एक नयी ‘कार्य संस्कृति’ की शुरुआत की है।
वह सिलवासा में एक चिकित्सा महाविद्यालय का उद्घाटन करने और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव में 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न अन्य परियोजनाओं का शुभारंभ करने के बाद बोल रहे थे।
केंद्र द्वारा वित्त पोषित ‘नमो चिकित्सा शिक्षा और शोध संस्थान’ केंद्र शासित प्रदेश का पहला चिकित्सा महाविद्यालय है। प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2019 में इसका शिलान्यास किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे पहले जिन सरकारी परियोजनाओं की आधारशिला रखी जाती थी, उनमें देरी होती थी। पिछले नौ वर्षों में हमने देश में एक नयी कार्यशैली विकसित की है। अब जिस कार्य की नींव रखी जाती है, उसे तेजी से पूरा करने का भी भरसक प्रयास किया जाता है। एक काम पूरा करते ही हम दूसरा काम शुरू कर देते हैं।’’
मोदी ने कहा कि देश का यह भी दुर्भाग्य रहा है कि अनेक दशकों तक विकास को राजनीति के वोटबैंक के तराजू पर ही तौला गया।
उन्होंने कहा, ‘‘परियोजनाओं की घोषणाएं होती थीं, लेकिन इसके केंद्र में कहां से कितना वोट मिलेगा और किस वर्ग को खुश करने से वोट मिलेगा, यह हुआ करता था। जिनकी पहुंच नहीं थी, जिनकी आवाज कमजोर थी, वो अभाव में रहे और विकास यात्रा में पीछे छूटते गए। यही कारण है कि हमारे आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्र विकास से वंचित रह गए।’’
उन्होंने दावा किया कि मौजूदा केंद्र सरकार सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर चल रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘देश के हर क्षेत्र का विकास हो, देश के हर क्षेत्र का संतुलित विकास हो, इस पर हमारा बहुत जोर है।’’
उन्होंने कहा कि छात्र अब अपनी स्थानीय ओं में चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर सकते हैं।
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