जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारों में तेजी के बीच तेल-तिलहन कीमतों में मिला-जुला रुख
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नयी दिल्ली, नौ दिसंबर विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को कारोबार का मिला-जुला रुख रहा। सस्ते आयातित तेल के सामने किसानों द्वारा नीचे भाव में बिक्री नहीं करने से सरसों तेल-तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में सुधार आया। आयातित तेल के सस्ता होने से जहां सोयाबीन तेल में, वहीं सर्दियों की मांग कम होने से पामोलीन कांडला की कीमतों में मामूली गिरावट आई।
सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल- तिलहन, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन दिल्ली तेल के भाव अपरिवर्तित रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा, ‘‘मलेशिया एक्सचेंज में लगभग एक प्रतिशत की तेजी है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज कल रात एक प्रतिशत तेज था और फिलहाल इसमें आधा-पौने प्रतिशत की तेजी है।’’
सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेल के सामने देश का तेल-तिलहन उद्योग अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। किसानों के पास पिछले साल का सोयाबीन का स्टॉक बचा हुआ है। इस साल मंडियों में कम भाव की वजह से किसानों की ओर से कम आवक हो रही है। इसके साथ ही कपास नरमा की भी आवक पिछले साल से लगभग आधी रह गई है। सस्ते आयातित तेल के सामने सरसों, मूंगफली और बिनौला तेल की पेराई करने में तेल मिलों को भारी नुकसान हो रहा है और इनकी ज्यादातर तेल मिलें बंद होने की कगार पर हैं। स्थिति यह बन गई है कि भाव नीचा होने के कारण किसान अपना माल बेच नहीं रहा, दूसरा ऊंचे भाव में उनका माल कोई खरीदता नहीं है।
सूत्रों ने कहा कि छोटे तेल-तिलहन उद्योग का संकट गहराता जा रहा है और उन्होंने सरकार से गुहार लगाई है कि स्थिति को संभालने के लिए आयातित सस्ते तेलों पर पर्याप्त आयात शुल्क लगा दिया जाये। उनका कहना है कि ऐसा नहीं होने से अगले महीने सूरजमुखी की बिजाई और उसके बाद आने वाली सरसों फसल की खपत प्रभावित होगी। जब देश के किसानों के लिए तिलहन की बाजार में खपत नहीं होगी तो वे तिलहन उत्पादन बढ़ाने को क्यों प्रेरित होंगे? उन्होंने कहा कि सस्ते आयात से घरेलू तेल-तिलहन उत्पादक, तेल मिलों और किसानों को ‘कवच’ देने के लिए आयातित तेलों पर आयात शुल्क लगाना समय की मांग है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार खाद्य तेल कंपनियों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) की भी निगरानी रखे और इसका पता लगाये कि सस्ता होने के बावजूद खाद्य तेल उपभोक्ताओं को मिल कितने में रहा है। इस निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित होगा कि उपभोक्ताओं को वास्तव में राहत मिले।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 7,050-7,100 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,410-6,470 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,000 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,415-2,680 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,115-2,245 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,175-2,300 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,500 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 11,450 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,000 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,550-5,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज 5,360-5,410 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 09, 2022 05:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

