जरुरी जानकारी | विदेशी बाजारों में मामूली घट-बढ़ के बीच तेल-तिलहनों कीमतों में मिला-जुला रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में मामूली घट-बढ़ के बीच सोमवार को देश के तेल-तिलहन बाजारों में कारोबार का मिला-जुला रुख दिखा। सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के दाम में जहां सुधार दिखा, वहीं मूंगफली तेल- तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल एवं पामोलीन तेल कीमतें गिरावट दर्शाती बंद हुईं। सरसों तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर विदेशी बाजारों में मामूली घट-बढ़ के बीच सोमवार को देश के तेल-तिलहन बाजारों में कारोबार का मिला-जुला रुख दिखा। सोयाबीन तिलहन और बिनौला तेल के दाम में जहां सुधार दिखा, वहीं मूंगफली तेल- तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल एवं पामोलीन तेल कीमतें गिरावट दर्शाती बंद हुईं। सरसों तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

सूत्रों ने कहा कि बाजार में खाद्य तेलों का खुदरा भाव महंगा है पर खुदरा भाव नरम होने के दावे किये जा रहे हैं। राजधानी-एनसीआर की प्रमुख दुग्ध कंपनी के सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी जैसे अधिक इस्तेमाल वाले खाद्य तेलों के खुदरा दाम देखकर ही सही तथ्य का अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारण के तरीके को व्यवस्थित किया जाये तभी उपभोक्ताओं को अपेक्षित लाभ मिल पायेगा।

सूत्रों ने कहा कि महाराष्ट्र में सोयाबीन किसानों की हालत पतली है क्योंकि उन्हें अपनी उत्पादन लागत को निकालना मुश्किल हो रहा है। आयातित तेल सस्ता होने की वजह से इन तेलों की खपत भी नहीं हो रही है। हालांकि, वहां के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास दाम मिल रहे हैं पर इसमें उन्हें लागत निकालने की कठिनाई हो रही क्योंकि माल खप नहीं रहा है। पिछले दो साल में इन्हीं किसानों ने सोयाबीन के लिए एमएसपी से कहीं काफी अधिक दाम प्राप्त किये थे।

सूत्रों ने कहा कि स्थिति की गंभीरता को हल्के में लिया जा रहा है लेकिन लंबे समय में मौजूदा स्थिति काफी परेशान करने वाली साबित होगी। ऐसे में तिलहन किसान अधिक लाभ देने वाली फसल की ओर अपना रुख कर लेंगे। आज जो स्थिति सूरजमुखी की हुई है कि एमएसपी अधिक होने के बावजूद किसान उसकी खेती करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे, कहीं ऐसा हाल सरसों या सोयाबीन के साथ न हो जाये, यह आशंका मंडरा रही है।

इस बीच, सरसों के अच्छे माल की कमी बनी हुई है और आगे नयी फसल आने पर ही स्थिति में कुछ बदलाव संभव है।

सूत्रों ने कहा कि सस्ते आयातित तेलों की भरमार के बीच मूंगफली तेल- तिलहन में गिरावट रही।

सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,775-5,825 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,950-7,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,375-2,660 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,820 -1,915 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,820 -1,930 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,850 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,825 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,950-5,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,750-4,850 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

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