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जरुरी जानकारी | तेल-तिलहन कीमतों में रहा मिला जुला रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. आयातित सस्ते तेलों के बीच शुक्रवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में कारोबार का मिला जुला रुख रखा। एक ओर जहां सरसों और मूंगफली तेल तिलहन के भाव में सुधार दिखा वहीं सोयाबीन तेल तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट आई। कारोबार की कमी के चलते कच्चा पामतेल (सीपीओ) और बिनौला के भाव पूर्ववत बंद हुए।

जरुरी जानकारी | तेल-तिलहन कीमतों में रहा मिला जुला रुख

नयी दिल्ली, 14 जुलाई आयातित सस्ते तेलों के बीच शुक्रवार को दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में कारोबार का मिला जुला रुख रखा। एक ओर जहां सरसों और मूंगफली तेल तिलहन के भाव में सुधार दिखा वहीं सोयाबीन तेल तिलहन और पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट आई। कारोबार की कमी के चलते कच्चा पामतेल (सीपीओ) और बिनौला के भाव पूर्ववत बंद हुए।

मलेशिया एक्सचेंज में ज्यादा घट बढ़ नहीं है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज सुबह तेज रहने के बाद फिलहाल मंदा चल रहा है।

सूत्रों ने बताया कि ब्रांडेड कंपनियों में सरसों के बेहतर दाने की मांग है क्योंकि नमी वाले सरसों से केवल रिफाइंड ही बन सकता है और ब्रांडेड कंपनियां इसे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखातीं। इसके अलावा मूंगफली की निर्यात की मांग के कारण इन दोनों तेल तिलहन कीमतों में सुधार आया।

उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख तेल उद्योग के संगठन, साल्वेंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के अनुसार मांग बढ़ने के कारण देश का खाद्य तेल आयात जून में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 39.31 प्रतिशत बढ़कर 13.11 लाख टन हो गया।

एसईए ने एक बयान में कहा, जून 2022 में खाद्य तेल का आयात 9.41 लाख टन रहा था।

इस साल जून में वनस्पति तेलों (खाद्य और अखाद्य) का कुल आयात 49 प्रतिशत बढ़कर 13.14 लाख टन हो गया, जो पिछले साल इसी महीने में 9.91 लाख टन था। आयात में 2,900 टन अखाद्य तेल शामिल थे।

सूत्रों ने कहा कि एसईए ने यह नहीं बताया कि लगभग 55-60 प्रतिशत आयात पर निर्भर देश भारत में देशी सूरजमुखी, सोयाबीन के साथ साथ सरसों व अन्य तिलहन जब खप नहीं रहे तो इतना आयात क्यों हो रहा है ? संगठन को यह भी बताना चाहिये कि आयात के बाद सोयाबीन डीगम जैसा खाद्यतेल का बंदरगाह पर नीचे भाव से क्यों बिक रहा है ?

सूत्रों ने कहा कि इस बात पर भी सोचने की जरुरत है कि हम अर्जेन्टीना और ब्राजील की तेल मिलें तो चला रहे हैं पर देशी तेल मिलें बंद होने लग रही हैं। हम सोयाबीन तेल का आयात क्यों नहीं नियंत्रित कर सकते जिसने हमारे देशी तिलहनों को बाजार में खपना दूभर कर दिया है।

उन्होंने कहा कि कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से कहा कि देश में इस बार तिलहन खेती का रकबा घटा है। पिछले साल सूरजमुखी की बिजाई 1.30 लाख हेक्टेयर में हुई थी लेकिन इस बार मानसून की सामान्य बरसात होने के बावजूद इस तिलहन का रकबा घटकर लगभग 40,000 हेक्टेयर ही रह गया है। पिछले साल सोयाबीन खेती का रकबा 93.61 लाख हेक्टेयर था जो इस बार घटकर 70.71 लाख हेक्टेयर रह गया है। यह कोई अच्छा संकेत नहीं है। इससे आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,400-5,450 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 7,075-7,125 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 17,380 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,510-2,785 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,750 -1,830 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,750 -1,860 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,100 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,950 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,340 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,100 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,480 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,970-5,065 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,735-4,830 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 14, 2023 09:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).