देश की खबरें | नये आपराधिक विधेयकों पर संसद की समिति के समक्ष प्रस्तुति दे सकते हैं गृह मंत्रालय के अधिकारी
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नयी दिल्ली, 22 अगस्त केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इस सप्ताह तीन विधेयकों पर संसद की एक समिति के सामने एक प्रस्तुति दे सकते हैं जो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 11 अगस्त को लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 पेश किया था।
ये विधेयक क्रमशः भारतीय दंड संहिता, 1860, दंड प्रक्रिया संहिता, 1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लेंगे।
गृहमंत्री के सुझाव के अनुसार, विधेयकों को गृह मामलों की संसद की स्थायी समिति को भेज दिया गया है, जिसकी अध्यक्षता उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य बृजलाल कर रहे हैं।
मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, "गृह सचिव और गृह मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस सप्ताह संसदीय समिति के सामने एक प्रस्तुति दे सकते हैं।’’
अधिकारियों ने कहा कि गृह मंत्रालय की टीम तीनों विधेयक लाने के पीछे के कारण, उनकी जरूरतें और यह बताएगी कि वे समाज की बदलती जरूरतों के लिए कैसे प्रासंगिक हैं।
प्रस्तावित कानूनों में कुछ मौजूदा सामाजिक वास्तविकताओं एवं अपराधों को परिभाषित करने और ऐसे अपराधियों और ऐसे मुद्दों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक तंत्र प्रदान करने का प्रयास किया गया है।
शाह ने विधेयकों को संसदीय समिति को भेजने का सुझाव देते हुए सांसदों से इनका सावधानीपूर्वक पड़ताल करने का अनुरोध किया था।
अधिकारियों ने कहा कि गृहमंत्री ने स्वयं तीन विधेयकों का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न हितधारकों के साथ 150 से अधिक बैठकों में भाग लिया था।
समिति के पास विधेयकों की पड़ताल करने और शीतकालीन सत्र में संसद को रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का समय है।
समिति के सदस्यों में बिप्लब कुमार देब, दिग्विजय सिंह, नीरज शेखर, काकोली घोष दोस्तीदार, दयानिधि मारन, वी डी राम और रवनीत सिंह शामिल हैं।
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