जरुरी जानकारी | पीएमईएसी के सदस्य ने कहा, भारत को निर्यात ‘महाशक्ति’ बनाने के लिए अवांछित नियमों से निजात जरूरी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अस्थायी सदस्य वी अनंत नागेश्वरन का मानना है कि भारत को निर्यात क्षेत्र में ‘महाशक्ति’ बनाने के लिए अवांछित नियमों से निजात पाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अवांछित नियमों को समाप्त करने से निर्यात क्षेत्र में चीन का अनुकरण करने के लिए भारत को एक शुरुआत मिलेगी।
मुंबई, 14 जुलाई प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के अस्थायी सदस्य वी अनंत नागेश्वरन का मानना है कि भारत को निर्यात क्षेत्र में ‘महाशक्ति’ बनाने के लिए अवांछित नियमों से निजात पाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अवांछित नियमों को समाप्त करने से निर्यात क्षेत्र में चीन का अनुकरण करने के लिए भारत को एक शुरुआत मिलेगी।
अकादमिक संस्थान एसपीजेआईएमआर द्वारा मंगलवार को आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नागेश्वरन ने निर्यात क्षेत्र में भारत को एक बड़ी ताकत बनाने के लिए शुरुआत करने की वकालत की। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस समय कई देशों में राष्ट्रवाद की लहर है जिसकी वजह से निर्यात करना मुश्किल है।
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क्रिया विश्वविद्यालय से जुड़े नागेश्वरन ने कहा, ‘‘हम अभी जिस स्थिति में हैं, मसलन हमारे कारोबार की ऊंची लागत और विधायी और अनुपालन के बोझ, वहां से हम चीन का अनुकरण नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि वियतनाम, मेक्सिको और बांग्लादेश अपने उद्योग चीन से हटा रहे हैं, भारत से नहीं। अभी हम वहां हैं ही नहीं।
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घरेलू बाजार के बारे में नागेश्वरन ने कहा कि 80 प्रतिशत आबादी के लिए उत्पाद बनाना इस बात पर निर्भर करता है कि उत्पाद पर कितनी लागत बैठ रही है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के स्तर पर लागू अनुपालन का बोझ चिंता बढ़ाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में स्पष्ट रूप से इन अवांछित नियमों, अंकुशों और नियमनों से निजात पाने की नीति एक शुरुआत होगी। ऐसा करने पर सरकार कारोबार से निकल सकेगी और एक स्पष्ट मध्यम अवधि का वृद्धि लक्ष्य दे सकेगी।’’
नागेश्वरन ने निर्यात बढ़ाने के प्रयासों को एक ‘प्रक्रिया’ बताते हुए कहा कि इस तरह का दबदबा तीन या छह महीने में हासिल नहीं हो सकता। उन्होंने इस दिशा में एक शुरुआत करने की वकालत की।
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