देश की खबरें | मेहुल चौकसी नेटफ्लिक्स ‘बैड ब्वाय बिलेनियर्स’ पर सुनवाई से पहले दो लाख रुपये जमा करे : अदालत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी को ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग मंच नेटफ्लिक्स पर ‘बैड ब्वाय बिलेनियर्स’ सीरीज की स्क्रीनिंग के संबंध में उसकी अपील पर आगे बढ़ने से पहले अदालत में दो लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया।
नयी दिल्ली, 31 जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी को ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग मंच नेटफ्लिक्स पर ‘बैड ब्वाय बिलेनियर्स’ सीरीज की स्क्रीनिंग के संबंध में उसकी अपील पर आगे बढ़ने से पहले अदालत में दो लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया।
प्रसारण से पहले सीरीज को उसे दिखाने की अर्जी को अदालत ने पहले ही खारिज कर दिया था। चौकसी ने अदालत के आदेश को चुनौती दी है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि चौकसी न तो भारतीय नागरिक है और न ही भारत का निवासी है तथा देश में उसके विरूद्ध कई (कानूनी/अदालती) कार्यवाहियां लंबित हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि उसकी याचिका स्वीकार नहीं की जाती है और उसपर कोई जुर्माना लगाया जाता है तो उसकी वसूली का कोई रास्ता नहीं होगा।
न्यायमूर्ति विभु बाखरू और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने उसे कार्यवाही शुल्क के खातिर उच्च न्यायालय रजिस्ट्री में दो लाख रुपये जमा कराने का निर्देश दिया।
पीठ ने 24 जुलाई को अपने आदेश में कहा, ‘‘अदालत का यह मत है कि यदि वर्तमान अपील में अपीलकर्ता नहीं जीतता है और उसपर जुर्माना लगाया जाता है और वह राशि प्रतिवादी (भारत सरकार एवं नेटफ्लिक्स) को दी जानी हो तो शायद उसकी वसूली का कोई तरीका नहीं होगा।’’
पीठ ने कहा, ‘‘यह अदालत इन कार्यवाही के शुरू होने से पहले अपीलकर्ता को आज से एक सप्ताह के अंदर दो लाख रुपये इस अदालत की रजिस्ट्री में जमा करने का आदेश देने को उचित समझती है ताकि वर्तमान कार्यवाही की लागत की वसूली हो।’’
उच्च न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख चार अगस्त तय की है।
चौकसी ने वकील विजय अग्रवाल के जरिये दायर अपील में कहा है कि उनका मुवक्किल बस इतना चाह रहा है कि यह मामला उन एकल न्यायाधीश के पास भेजा जाए जिन्होंने अर्जी खारिज की थी।
एकल न्यायाधीश ने 28 अगस्त, 2020 को यह कहते हुए चौकसी को राहत देने से इनकार कर दिया था कि निजी अधिकारी को लागू करने के लिए रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
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