देश की खबरें | राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में एचपीवी को शामिल करने को लेकर बैठक
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अगले साल से बच्चियों को गर्भाशय के कैंसर से बचाने वाले ‘ह्यूमन पैपिलोमावायरस’ (एचपीवी) टीके को शामिल करने को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों के साथ बैठक की है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, 18 दिसंबर राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में अगले साल से बच्चियों को गर्भाशय के कैंसर से बचाने वाले ‘ह्यूमन पैपिलोमावायरस’ (एचपीवी) टीके को शामिल करने को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों के साथ बैठक की है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
पुणे स्थित ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (एसआईआई) और अमेरिकी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी ‘मेर्क’ के प्रतिनिधि बृहस्पतिवार को हुई इस बैठक में शामिल हुए और अपनी उत्पादन क्षमता और अपने टीके की कीमत के बारे में बताया।
एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, ‘‘मंत्रालय वर्ष 2023 की शुरुआत में एचपीवी टीके की 16.02 करोड़ खुराक के लिए वैश्विक निविदा जारी कर सकता है जिसकी आपूर्ति वर्ष 2026 तक की जाएगी। वैश्विक टीका निर्माता मेर्क और एसआईआई के इस निविदा में शामिल होने की संभावना है।’’
जुलाई 2022 में भारतीय दवा नियामक ने एसआईआई को स्वदेश निर्मित एचपीवी टीका बाजार में उतारने की अनुमति दे दी थी, लेकिन अब तक इस टीके को जारी नहीं किया गया है।
हालांकि, हाल ही में एसआईआई के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने इस बात की पुष्टि की थी कि उनकी कंपनी ‘सेर्वावैक’ (सीईआरवीएवीएसी) नाम का अपना एचपीवी टीका वर्ष 2023 की पहली तिमाही में किफायती दर पर लॉन्च कर देगी जो भारत में उपलब्ध विदेशी एचपीवी टीके के मुकाबले सस्ता होगा।
एचपीवी टीका तीन विदेशी कंपनियां बना रही हैं जिनमें से दो कंपनियां भारत में अपना टीका बेचती हैं। सूत्रों ने कहा कि इस टीके के एक खुराक की कीमत 4,000 रुपये से अधिक है। गत सितंबर में एसआईआई के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा था कि एचपीवी टीका भारत में प्रति खुराक दो से चार सौ रुपये में उपलब्ध होगा।
टीकाकरण पर गठित राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह के अध्यक्ष डॉ. एन के अरोड़ा ने हाल ही में कहा था कि भारत में अगले साल के मध्य तक राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में एचपीवी टीका को शामिल कर इसे नौ से 14 साल के बच्चों को लगाया जा सकेगा।
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