देश की खबरें | न्याय, नागरिक सुरक्षा संहिता, साक्ष्य संबंधी विधेयकों पर संसदीय समिति की बैठक, गृह सचिव ने प्रस्तुति दी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. संसद की एक समिति ने भारतीय न्याय प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव डालने वाले तीन विधेयकों…‘न्याय संहिता 2023’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023’ पर बृहस्पतिवार को विचार विमर्श शुरू किया और प्रस्तावित कानून के विभिन्न आयामों को लेकर गृह सचिव अजय भल्ला ने विस्तृत प्रस्तुति दी।

नयी दिल्ली, 24 अगस्त संसद की एक समिति ने भारतीय न्याय प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव डालने वाले तीन विधेयकों…‘न्याय संहिता 2023’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023’ और ‘भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023’ पर बृहस्पतिवार को विचार विमर्श शुरू किया और प्रस्तावित कानून के विभिन्न आयामों को लेकर गृह सचिव अजय भल्ला ने विस्तृत प्रस्तुति दी।

सूत्रों ने बताया कि समिति में विपक्षी दलों के सदस्यों ने विचार विमर्श के दौरान कई मुद्दे उठाये। इसमें द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने बैठक के दौरान विधेयकों के हिन्दी नामों पर अपनी असहमति जतायी और इसे संविधान के अनुच्छेद 348 का उल्ल्ंघन बताया तथा सुझाव दिया कि समिति को विभिन्न राज्यों के बार काउंसिल के सदस्यों, न्यायाधीशों आदि के साथ विचार विमर्श करना चाहिए। समझा जाता है कि उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि आपराधिक सुनवाई जिला स्तरीय अदालतों में होती है।

सूत्रों ने बताया कि द्रमुक सांसद ने कहा कि समिति को राज्यों का दौरा करना चाहिए ताकि विभिन्न पक्षकारों के विचार सुन सके। इसका तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन जैसे कुछ विपक्षी सदस्यों ने समर्थन किया।

उन्होंने बताया कि मारन ने एक पत्र भी पेश किया जिसमें उन्होंने कई आपत्तियां गिनायीं और मांगें रखीं। इसमें विधेयक का नाम अंग्रेजी में दिया जाना शामिल है।

समिति में भारतीय जनता पार्टी के कई सदस्यों ने विधेयकों के प्रावधानों की सराहना की।

सूत्रों ने बताया कि समिति के सदस्य एवं भाजपा सांसद दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अनेक बार गंभीर मामलों में भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता है और उन्होंने यह सुनिश्चित करने की मांग की कि पीड़ितों को न्याय मिले।

सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन ने कहा कि जब वर्तमान कानून में संशोधन किया जा सकता था तब ये विधेयक क्यों लाए गए।

वहीं कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि समिति को जल्दबाजी में रिपोर्ट तैयार नहीं करनी चाहिए।

प्रस्तावित नये कानूनों में ‘मॉब लिचिंग (भीड़ द्वारा पीट पीटकर हत्या)’ के लिए सात साल या आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रस्ताव किया गया है और साथ ही राजद्रोह कानून को समाप्त करने की बात कही गई है। इसमें भगोड़े आरोपियों की अनुपस्थिति में उन पर मुकदमा चलाने का प्रस्ताव भी किया गया है।

केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने इन तीन विधेयकों पर संसद की गृह मामलों संबंधी स्थायी समिति के सामने प्रस्तुति दी। वह 25 अगस्त और 26 अगस्त को भी इस विषय पर प्रस्तुति देंगे।

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