देश की खबरें | तमिलनाडु में चिकित्सा लापरवाही : बच्चे के माता-पिता जांच में हुए शामिल, न्याय की मांग की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. तमिलनाडु की राजधानी के एक अस्पताल में कथित मेडिकल लापरवाही के चलते जिस 18 माह के बच्चे की दायीं बांह काटनी पड़ी, उसके माता-पिता ने मंगलवार को अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की।
चेन्नई, चार जुलाई तमिलनाडु की राजधानी के एक अस्पताल में कथित मेडिकल लापरवाही के चलते जिस 18 माह के बच्चे की दायीं बांह काटनी पड़ी, उसके माता-पिता ने मंगलवार को अपने बेटे के लिए न्याय की मांग की।
बच्चे के माता-पिता ने कहा कि अपने बेटे का अब एक ही हाथ होने की पीड़ा के अलावा उन्हें इस बात का भी दुख है कि मेडिकल लापरवाही के मुद्दे को व्यक्तिगत फायदे के लिए मीडिया में ले जाने का उन पर आरोप लगाया जा रहा है।
बच्चे की बांह दो जुलाई को एक सर्जरी के जरिये शरीर से काटकर हटाई गई थी।
बच्चे की मां अजीसा ने कहा, ‘‘हमने अपने बेटे के मस्तिष्क में तरल पदार्थ जमा होने का इलाज कराने के लिए उसे राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (आरजीजीजीएच) में 25 जून को भर्ती कराया था। उस वक्त उसकी दोनों बांह अच्छी स्थिति में थी। लेकिन अब उसकी एक ही बांह है।’’
बच्चे के पिता तास्तकीर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘समस्या का समाधान करने के बजाय हम पर व्यक्तिगत फायदे के लिए प्रचार पाने का आरोप लगाया जा रहा है। ’’
दंपती ने मेडिकल लापरवाही के मुद्दे की जांच कर रही उच्च स्तरीय समिति के समक्ष पेश होने के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए यह बात कही।
दंपती रामनाथपुरम के रहने वाले हैं। बच्चे के हाइड्रोसेफलस से पीड़ित होने का पता चला था। यह तंत्रिका तंत्र संबंधी एक विकार है जो मस्तिष्क में असमान्य रूप से तरल पदार्थ बनने से होता है।
अजीसा ने संवाददाताओं को बताया कि जांच आयोग ने 21 प्रश्नों पर दंपती के लिखित में जवाब लिए।
उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे की दायीं बांह में आईवी प्रवेशनी (केनुला) गलत तरीके से लगाये जाने के चलते यह समस्या पैदा हुई। उन्होंने कहा, ‘‘जहां आईवी लाइन लगाई गई थी उसके आसपास से लेकर कलाई तक उसकी त्वचा का रंग लाल हो गया। मैंने तुरंत एक नर्स को इसकी जानकारी दी। यदि नर्स शीघ्र इसे देखती और समय पर आईवी लाइन हटा देती तो मेरे बेटे को अपनी बांह नहीं गंवानी पड़ती।’’
अस्पताल ने कहा है कि बच्चे को एगमोर गवर्नमेंट हॉस्पिटल से आरजीजीजीएच में लाया गया था और उसकी हालत बिगड़ने पर उसकी जान बचाने के लिए उसकी बांह सर्जरी कर हटानी पड़ी।
अजीसा ने अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा, ‘‘किसी भी मां को ऐसा दिन ना देखना पड़े। मैं अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करती हूं। तमिलनाडु सरकार को (अस्पताल) कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।’’
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एम सुब्रमण्यन ने चिकित्सकों या कर्मचारी की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही बरते जाने की बात से इनकार किया था।
सरकार ने मेडिकल चूक के कथित मुद्दे की जांच के लिए तीन सर्जन की एक समिति गठित की थी।
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