देश की खबरें | मायावती के भाजपा विरोधी मोर्चे में शामिल नहीं होने का अफसोस है : राहुल

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रायबरेली, 20 फरवरी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उन्हें पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) में शामिल नहीं होने से निराशा हुई थी।

अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली के दो दिवसीय दौर पर आज पहुंचे लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने यहां बरगद चौराहे के पास 'मूल भारती' छात्रावास के अनुसूचित जाति के छात्रों के एक समूह के साथ बातचीत की।

गांधी ने छात्रों से भारतीय राजनीति में बसपा के संस्थापक कांशीराम की भूमिका के बारे में भी बातचीत की। उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि कांशीराम जी ने नींव रखी और बहनजी (मायावती) ने उस पर निर्माण किया।''

इसके बाद उन्होंने मायावती के मौजूदा राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते हुए कहा, ''मैं चाहता था कि बहनजी हमारे साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ लड़ें, लेकिन किसी कारण से उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह बेहद निराशाजनक है। अगर तीनों पार्टियां एकजुट होतीं, तो भाजपा कभी नहीं जीत पाती।''

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने पिछले साल हुआ लोकसभा चुनाव ‘इंडिया’ गठबंधन के तहत साथ मिलकर लड़ा था और उसने सफलता हासिल करते हुए उत्तर प्रदेश की 80 में से 43 सीटें जीती थीं।

गांधी ने बड़े कॉरपोरेट समूहों की आलोचना करते हुए दावा किया कि नौकरियां ''अम्बानी और अदाणी से नहीं आती हैं, बल्कि छोटे व्यवसायों से मिलती हैं।''

उन्होंने देश की आबादी में दलितों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत होने का जिक्र करते हुए कुछ शीर्ष निजी कंपनियों के नाम बताए जो '500 बड़ी' कम्पनियों का हिस्सा हैं और युवाओं से पूछा कि उनमें से कितनी कंपनियों के मालिक दलित समाज के हैं।

जब एक युवा ने जवाब दिया "कोई नहीं", तो गांधी ने उससे पूछा, "क्यों नहीं?" इस पर दूसरे युवा ने जवाब दिया ''क्योंकि हमारे पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।''

गांधी ने इससे असहमति जताते हुए कहा ''(भीमराव) आंबेडकर जी के पास कोई सुविधा नहीं थी। उन्होंने अपने बलबूते प्रयास किये। फिर भी उन्होंने देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया।''

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने छात्रों से कहा, ''एक पूरी व्यवस्था है जो आपके खिलाफ है और वह नहीं चाहती कि आप आगे बढ़ें। व्यवस्था आप पर हर रोज हमला करती है और आधे समय तो आपको पता भी नहीं चलता कि यह आप पर कैसे हमला करती है।''

उन्होंने कहा, ''आपको यह समझने की जरूरत है कि संविधान की विचारधारा आपकी विचारधारा है। मैं आपसे गारंटी के साथ यह कह सकता हूं कि अगर इस देश में दलित नहीं होते, तो इसे अपना संविधान नहीं मिलता। यह आपकी विचारधारा है, यह आपका संविधान है, लेकिन अब आप जहां भी जाते हैं तब आपको व्यवस्था के हाथों कुचल दिया जाता है।''

गांधी ने संविधान की प्रति लेकर पूछा, ''यह कितनी पुरानी है? यह तीन हजार साल पुरानी किताब है, जिसमें उतने ही पुराने विचार हैं। इसमें भगवान बुद्ध और कई महान हस्तियों के विचार शामिल हैं। जब डॉक्टर आंबेडकर ने संविधान बनाया, तो ये विचार कहां से आये? ये आपके समाज से आये।''

चर्चा के दौरान भोलानाथ नाम के एक छात्र ने बी.एड. की डिग्री पूरी करने के बावजूद नौकरी के अवसरों की कमी पर चिंता जताई। इस पर गांधी ने जवाब दिया, ''सरकार ने आदिवासियों और पिछड़े समुदायों के लिए अवसर बंद कर दिए हैं। वे निजीकरण को बढ़ावा दे रहे हैं।''

एक अन्य छात्र प्रमोद कुमार ने पूछा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो बेरोजगार युवा उससे क्या उम्मीद कर सकते हैं? इस पर कांग्रेस सांसद ने जवाब दिया, ''जब हमारी सरकार आएगी, तो हम सरकारी क्षेत्र में अधिकतम भर्ती सुनिश्चित करेंगे। नौकरियां अम्बानी और अदाणी नहीं बनाते; वे छोटे व्यवसायों से आती हैं।''

गांधी ने आर्थिक विषमताओं के बारे में कहा, ''अदाणी आसानी से एक लाख करोड़ रुपये का बैंक से कर्ज ले सकते हैं, और अगर वह चुकाने में विफल रहते हैं, तो उसे माफ कर दिया जाएगा। लेकिन अगर आप कर्ज लेते हैं और उसे माफ करने को कहते हैं तो आपको भगा दिया जाएगा। ये बैंक अदाणी और अम्बानी के नहीं हैं; ये आम लोगों के हैं। जीएसटी में सुधार की ज़रूरत है।''

गगन कुमार नामक छात्र ने अनुसूचित जातियों और वंचित समुदायों के लिए एक विश्वविद्यालय की स्थापना का अनुरोध किया। जवाब में गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत के रुख की आलोचना करते हुए कहा, ''मोहन भागवत कहते रहते हैं कि लोगों को अंग्रेजी के बजाय हिंदी बोलनी चाहिए। लेकिन अगर आप अंग्रेजी सीखते हैं, तो आप कहीं भी जा सकते हैं और किसी भी कंपनी के लिए काम कर सकते हैं।''

लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी बृहस्पतिवार को दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र पहुंचे। लखनऊ से सड़क मार्ग से गांधी सबसे पहले चुरुवा सीमा पर हनुमान मंदिर गए, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना की।

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