देश की खबरें | मथुरा : प्रेम महाविद्यालय के जीर्णोद्धार कार्य का भूमि पूजन हुआ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मथुरा के वृंदावन में प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राजा महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा स्थापित प्रेम महाविद्यालय के जर्जर भवन के जीर्णोद्धार कार्य के लिए शनिवार को भूमि पूजन किया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

मथुरा (उप्र), छह अगस्त मथुरा के वृंदावन में प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राजा महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा स्थापित प्रेम महाविद्यालय के जर्जर भवन के जीर्णोद्धार कार्य के लिए शनिवार को भूमि पूजन किया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्रा तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में रेलिगेयर इंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के सहयोग से कराए जाने वाले इस जीर्णोद्धार कार्य के लिए भूमि पूजन किया गया।

करीब 112 साल पहले महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा शुरू किए गए प्रेम महाविद्यालय का पुराना गौरव वापस लाने के उद्देश्य से इस परियोजना के तहत रेलिगेयर ग्रुप, महाविद्यालय में कक्षाओं के साथ-साथ पुस्तकालय, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर कक्ष, सभा कक्ष, स्टाफ रूम तथा प्रशासनिक कार्यालय बनवाएगा।

आरईएल की अधिशासी अध्यक्ष डॉक्टर रश्मि सलूजा ने समूह की इस महत्वाकांक्षी पहल पर कहा, ‘‘भारत की परंपरागत शिक्षण प्रणाली ने दुनिया को अनेक विद्वान और दार्शनिक दिए हैं। प्रेम महाविद्यालय के पुनरुद्धार कार्य में योगदान करके हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। हम राजा महेंद्र प्रताप सिंह की खोई हुई विरासत को वापस लाना चाहते हैं। हमारी इस पहल का मकसद शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में इस क्षेत्र की पुरानी पहचान को वापस लाना है।’’

उन्होंने कहा कि महाराजा महेंद्र प्रताप सिंह ने वर्ष 1909 में अपने इस महल को एक शिक्षण संस्थान शुरू करने के लिए दान कर दिया था। एक समय यह महल अनेक स्वतंत्रता सेनानियों का गढ़ हुआ करता था।

सलूजा ने बताया कि रेलीगेयर की इस परियोजना के तहत राजा महेंद्र प्रताप सिंह के कमरे और तहखाने को संग्रहालय के तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि आम लोग उनके जीवन और उनके व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं को करीब से देख सकें।

उन्होंने कहा कि रेलीगेयर चाहता है कि छात्र समुदाय में देश की समृद्ध शैक्षणिक विरासत को लेकर गर्व की भावना उत्पन्न हो।

शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी, समाज सुधारक और दानवीर थे। उन्होंने 1909 में वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की जो तकनीकी शिक्षा के लिहाज से भारत का प्रथम केंद्र माना जाता है।

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