देश की खबरें | कोविड-19 की गंभीरता पर गणितीय मॉडल विफल रहे :आईजेएमआर संपादकीय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. आईसीएमआर के इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 की गंभीरता पर अनेक गणितीय मॉडलों में पूर्वाग्रह एक बड़ा कारक था और संक्रमण तथा मृत्यु के मामलों का आकलन करने के लिए धारणाओं का इस्तेमाल किया गया।
नयी दिल्ली, 18 जून आईसीएमआर के इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 की गंभीरता पर अनेक गणितीय मॉडलों में पूर्वाग्रह एक बड़ा कारक था और संक्रमण तथा मृत्यु के मामलों का आकलन करने के लिए धारणाओं का इस्तेमाल किया गया।
इसमें कहा गया है कि आगे की योजनाओं पर नीतिगत फैसले लेने के लिए केवल इन मॉडलों पर निर्भर रहना एक बड़ा जोखिम का काम है क्योंकि नये वायरस के लिहाज से संक्रामक रोग का अनुमान लगाना बहुत ही खतरनाक काम है और इसलिए इससे बचा जाना चाहिए।
‘भारत में कोविड-19 महामारी के शुरुआती 100 दिन में सीखे गए सबक’ शीर्षक से प्रकाशित संपादकीय को विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के लिए संक्रामक रोगों के पूर्व निदेशक राजेश भाटिया और आईसीएमआर-राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान की निदेशक प्रिया अब्राहम ने लिखा है।
इसमें कहा गया है कि अनेक गणितीय मॉडलों में संक्रमण तथा मौत के मामलों के संदर्भ में महामारी के प्रकोप के स्तर का आकलन किया गया था और कम से कम भारत के संदर्भ में तो इनमें से एक भी मॉडल सही साबित नहीं हुआ तथा ये संक्रामक रोग के जैविक परिदृश्य को नहीं समझ सके।
संपादकीय के अनुसार, ‘‘जाहिर है कि कोविड-19 के दौरान पेश किए गए मॉडल में पूर्वाग्रह का एक भारी पक्ष था और इसमें धारणाओं का इस्तेमाल किया गया जो वास्तविकता से कोसों दूर साबित हुईं।’’
संपादकीय में लेखकों ने लिखा है कि 30 जनवरी से 10 मई के महामारी के शुरुआती सौ दिन के दौरान एक और सबक यह सीखने को मिला कि वायरस संक्रमण को कम करने के लिए साक्ष्य-आधारित रणनीति थोड़े समय के लिए ही कारगर रही और देश में लंबे लॉकडाउन के बावजूद नये मामले बढ़ते रहे।
उन्होंने कहा, ‘‘नयी जगहों पर मामले बड़ी संख्या में सामने आते रहे और इससे लॉकडाउन के क्रियान्वयन में उल्लंघन का संकेत मिला।’’
संपादकीय के अनुसार लॉकडाउन का असर शुरू में दिखाई दिया और इससे स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने तथा जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अत्यावश्यक समय मिल गया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)