देश की खबरें | केरल सचिवालय में आग लगने पर भारी विरोध, प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े ग

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल सचिवालय में आग लगने की घटना के खिलाफ कई स्थानों पर बुधवार को प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

तिरुवनंतपुरम, 26 अगस्त केरल सचिवालय में आग लगने की घटना के खिलाफ कई स्थानों पर बुधवार को प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

विभिन्न संगठनों ने इस आग में “महत्त्वपूर्ण फाइलें” जल जाने का आरोप लगाते हुए राज्य भर में मार्च निकाला।

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पुलिस की कार्रवाई में कई कार्यकर्ता कथित तौर पर घायल हो गए।

कांग्रेस और भाजपा, उनके युवा शाखा संगठनों, महिला शाखा संगठनों और सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने वामपंथी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए यहां सचिवालय समेत कई स्थानों पर मार्च निकाला।

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कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कल शाम लगी आग सोने की तस्करी मामले से जुड़ी “फाइलों को नष्ट करने की चाल” थी।

सरकार इस बात पर कायम है कि कोई भी महत्त्वपूर्ण फाइल नष्ट नहीं हुई है क्योंकि राज्य सचिवालय ने कुछ साल पहले कागजरहित सचिवालय पहल के तहत ई-फाइल प्रणाली में अपनी सारी फाइलों को डाल दिया था।

पुलिस ने तिरुवनंतपुरम में सचिवालय परिसर में घुसने और पुलिस अवरोधक को पार करने की कोशिश कर रहे भाजपा की युवा शाखा, युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछार की और आंसू गैस के गोले दागे।

भाजपा ने एक अन्य रैली निकाली। युवा कांग्रेस, कांग्रेस और एसडीपीआई ने भी रैली निकाली।

महिला कांग्रेस ने भी सचिवालय तक मार्च किया और सुबह से परिसर के आस-पास लगाए गए अवरोधकों को तोड़ने की कोशिश की।

सूत्रों ने बताया कि युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कन्नूर और एर्नाकुलम में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के पुतले फूंके।

पुलिस ने कहा कि युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जिलों में भी प्रदर्शन किया और कोल्लम में उन्हें पीछे हटाने और गिरफ्तार किए जाने के दौरान उनके और पुलिस के बीच मामूली झड़प भी हुई।

कन्नूर तक युवा मोर्चा का मार्च कथित तौर पर हिंसक हो गया जिसमें कई लोग घायल हो गए।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नीथला ने मुख्य सचिव विश्वास मेहता पर तीखा हमला बोला और कहा कि वह अब “अविश्वास मेहता” हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि फाइलों को स्वप्न सुरेश (सोने की तस्करी मामले के मुख्य आरोपी), शिवशंकर (निलंबित आईएएस अधिकारी और मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव) और मुख्यमंत्री को बचाने के लिए नष्ट किया गया।

उन्होंने कहा, “सरकार ने खुद के बचाव के लिए मुख्य सचिव को नियुक्त किया। वह अब विश्वास मेहता नहीं बल्कि अविश्वास मेहता हो गए हैं।”

चेन्नीथला ने सचिवालय के सामने विरोध मार्च के दौरान संवाददाताओं से कहा, “जब कल सामान्य प्रशासन विभाग में आग लगी थी, तो मेहता ने मीडिया को वहां से भगा दिया जो यह जानने आया था कि क्या हुआ है।”

चेन्नीथला ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को एक पत्र भी लिखा है जिसमें उन्होंने इस “घोर लापरवाही” पर “स्पष्टीकरण” देने के लिए मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को “तलब” करने की अपील की है।

इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने कहा कि ई-फाइलों पर सरकार की सफाई संतोषजनक नहीं हैं और यह आग “पूर्व नियोजित” थी।

सुरेंद्रन ने पूछा, “ज्यादातर कर्मचारी पृथक-वास में थे और सरकार ने अब भी उन लोगों का ब्योरा नहीं दिया है जो संक्रमित हैं और कितने स्टाफ पृथक-वास में हैं।”

उन्होंने पूछा, “कोविड-19 के चलते कार्यालय को जब बंद किया गया तो क्या सरकार ने इसकी सूचना मीडिया को दी थी?”

माकपा के प्रदेश अध्यक्ष कोडियेरी बालाकृष्णन ने आरोप लगाया कि राज्य विधानभा में अविस्वास प्रस्ताव में मिली हार की बदनामी को छिपाने के लिए कांग्रेस हिंसा का सहारा ले रही है।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और भाजपा दोनों साथ मिलकर हिंसा भड़काने की कोशिश कर रही है और यह इससे साफ होता है कि आग लगने के थोड़ी देर बाद ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्रन और विपक्षी कांग्रेस नेता चेन्नीथला मौके पर पहुंच गए।

उन्होंने कहा कि सभी जरूरी फाइलें ई-फाइलिंग प्रणाली में मौजूद हैं और विपक्ष सारी बातें जानते हुए भी प्रदर्शन कर रहा है और हिंसा “भड़काने” की कोशिश कर रहा है।

बालाकृष्णन ने कहा, “विपक्ष इन सभी बातों से अवगत है लेकिन फिर भी गलत विमर्श और हिंसा फैलाने का सहारा ले रहा है।”

उन्होंने कहा, “मामले की जांच करने के दौरान, इसमें कांग्रेस और भाजपा की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।”

भाकपा की युवा शाखा, एआईवाईएफ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा राज्य की राजधानी में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रही हैं।

एआईवाईएफ ने एक बयान में कहा, “दोनों दलों ने सारी सीमाएं पार कर दी हैं और इस विरोध नाटक में लिप्त हैं। विपक्ष को स्पष्ट करना ही होगा कि वे प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। ऐसा मालूम होता है कि इसके पीछे कोई साजिश है।”

गौरतलब है कि राज्य सरकार को सोना तस्करी मामले में काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला संयुक्त अरब अमीरात दूतावास के पते पर भेजे गए राजनयिक सामान से जुड़ा हुआ है और इसकी जांच एनआईए, सीमा शुल्क विभाग और प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है।

एनआईए ने स्वप्न सुरेश और सरीथ समेत दूतावास के कई पूर्व कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।

कांग्रेस ने आग की घटना में मंगलवार को एनआईए जांच की मांग की थी जबकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने आग लगने के तुरंत बाद परिसर में जबर्दस्ती घुसने के लिए गिरफ्तारी दी थी।

राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति को नियुक्त किया है और एक हफ्ते के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है जबकि अपराध शाखा भी इसकी जांच करेगी।

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