एजेंसी न्यूज

देश की खबरें | वैवाहिक बलात्कार : इसका विस्तृत सामाजिक-कानून प्रभाव होगा, परामर्श प्रक्रिया आवश्यक : केन्द्र ने अदालत से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह ‘‘प्रत्येक महिला की स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, जोकि सभ्य समाज की नींव और स्तंभ है’’, लेकिन वैवाहिक बलात्कार को अपराध करार देने संबंधी याचिकाओं पर विभिन्न पक्षकारों और राज्य सरकारों के साथ अर्थपूर्ण परामर्श प्रक्रिया आवश्यक है।

देश की खबरें | वैवाहिक बलात्कार : इसका विस्तृत सामाजिक-कानून प्रभाव होगा, परामर्श प्रक्रिया आवश्यक : केन्द्र ने अदालत से कहा

नयी दिल्ली, तीन फरवरी भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह ‘‘प्रत्येक महिला की स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, जोकि सभ्य समाज की नींव और स्तंभ है’’, लेकिन वैवाहिक बलात्कार को अपराध करार देने संबंधी याचिकाओं पर विभिन्न पक्षकारों और राज्य सरकारों के साथ अर्थपूर्ण परामर्श प्रक्रिया आवश्यक है।

भारत सरकार ने कहा कि वैवाहिक संबंध में बलात्कार को अपराध की श्रेणी में शामिल करने पर का देश में व्यापक सामाजिक-कानून प्रभाव होगा और इस मुद्दे पर सरकार की कोई भी सहायता सभी पक्षों के साथ परामर्श प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही अर्थपूर्ण साबित होगी।

वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में शामिल करने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई कुछ समय के लिए रोकने का अनुरोध करते हुए केन्द्र ने न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सी. हरी शंकर की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में कहा कि वह अदालत को एक समयबद्ध कार्यक्रम सौंपेगा जिसमें वह इस मुद्दे पर प्रभावी परामर्श प्रक्रिया पूरी करेगा।

इस मुद्दे पर रोजाना सुनवाई कर रही अदालत में शुक्रवार को भी बहस जारी रहेगी।

अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा के माध्यम से दायर हलफनामे में केन्द्र ने कहा, ‘‘अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए कार्यपालिका और विधायिका दोनों समान रूप से चिंतित और प्रतिबद्ध हैं। लेकिन, गहन विचार के बाद केन्द्र सरकार का यह मानना है कि सभी पक्षों और राज्य सरकारों के साथ परामर्श करने के बाद ही केन्द्र सरकार अदालत की मदद कर सकेगा।’’

उसने कहा, ‘‘समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, करीबी परिवार संबंधों से जुड़ा मुद्दा होने और अदालत के पास इस विस्तृत, बड़ी आबादी वाले और विविधतापूर्ण देश के समाज के विभिन्न हिस्सों की जमीनी स्तर की हकीकत से पूरी वाकिफ होने का विशेषाधिकार नहीं है, ऐसे में महज कुछ वकीलों की दलीलों पर इसे तय करना पूरी तरह न्याय नहीं होगा।’’

भारत सरकार ने कहा कि इस मौखिल दलील को हलफनामे के रूप में विभिन्न स्तरों पर सुनवाई के दौरान जनवरी में अदालत दायर कर इसे आगे बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 03, 2022 08:11 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).