देश की खबरें | मतदाता सूची में नाम न होने से बिना वोट डाले लौटे कई कश्मीरी पंडित

जगती (जम्मू), 13 मई मतदाता सूची में नाम ना होने की वजह से विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय के कई सदस्य जम्मू में सोमवार को मतदान नहीं कर सके।

जम्मू में बनाए गए विशेष मतदान केंद्रों पर कश्मीर पंडित समुदाय के सदस्य मतदान करने पहुंचे लेकिन कई मतदाताओं को बिना वोट डाले लौटना पड़ा।

जगती शिविर निवासी और हब्बाकदल इलाके से ताल्लुक रखने वाली वीना ने कहा, “ इतनी गर्मी के बावजूद मैं अपने परिवार के तीन सदस्यों के साथ वोट डालने मतदान केंद्र आई थी। हमारे पास मतदाता पहचान पत्र भी है, लेकिन हमारे नाम मतदाता सूची में नहीं हैं। यह हमें मतदान के अधिकार से वंचित करना है।”

उन्होंने कहा कि जब मतदाता पहचान पत्र होना ही काफी नहीं है, तो फिर इसका इस्तेमाल क्या है।

वीना ने कहा, “ इन पहचान पत्रों को निर्वाचन आयोग को रद्द कर देना चाहिए। सरकार चाहती है कि हम वोट डालें लेकिन साथ ही एक प्रक्रिया है जो हमारे मतदान के अधिकार से वंचित करती है।”

अविनाश रैना और उनके परिवार के चार सदस्यों को भी अपने मताधिकार का प्रयोग किए बिना वापस लौटना पड़ा।

उन्होंने कहा, "हम यहां मतदान करने आए थे। हमारा नाम मतदान सूची में नहीं है। अब हम क्या करें? यहां हमारी बात सुनने और समस्या का समाधान करने वाला कोई नहीं है।"

कांग्रेस नेता और जगती टेनमेंट कमेटी के अध्यक्ष शादी लाल पंडिता ने कहा कि सरकार कश्मीरी पंडित समुदाय पर वोट देने नहीं आने का आरोप तो लगा देगी, “लेकिन जमीनी हकीकत देखिए, उनके पास मतदाता पहचान पत्र हैं लेकिन उनके नाम सूची में शामिल नहीं हैं। यह गंभीर अन्याय है।"

प्रवासी मामलों के सहायक चुनाव निर्वाचन अधिकारी (एईआरओ) डॉ. रियाज़ अहमद ने कहा कि मतदाता सूची तैयार करने में पुराने आंकड़ों के इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा, "हम इस समस्या से अवगत हैं। हमने इन मुद्दों को हल करने की कोशिश की। हमने मतदान कर्मचारियों से कहा है कि वे ऐसे मतदाताओं को वोट देने की अनुमति दें।"

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