देश की खबरें | मणिपुर: कर्फ्यूग्रस्त चुराचांदपुर में नये सिरे से बंद; विधायकों, आदिवासी संगठनों ने शांति की अपील की

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चुराचांदपुर/इंफाल, 19 मार्च मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में कर्फ्यू के दौरान हमार और जोमी समुदाय के लोगों के बीच झड़प के मद्देनजर एक छात्र संगठन ने नये सिरे से बंद का आह्वान किया, जिसके बाद विधायकों के एक समूह और आदिवासी संगठनों ने बुधवार को शांति की अपील की।

जिले में तनाव के बीच पूरे दिन शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ अधिकांश दुकानें और बाजार बंद रहे। निजी वाहन भी सड़कों से नदारद रहे।

जोमी और हमार जनजातियों के लोगों के बीच मंगलवार देर रात ताजा झड़पें शुरू हो गईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए। यह झड़प दोनों समुदायों के शीर्ष निकायों के शांति समझौते पर पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद हुई।

ताजा झड़पें तब शुरू हुईं, जब कुछ लोगों ने शहर में जोमी उग्रवादी संगठन का झंडा उतारने की कोशिश की। इस घटना के जवाब में जोमी छात्र संघ ने तत्काल प्रभाव से जिले में बंद की घोषणा कर दी।

एक संयुक्त बयान में, चुराचांदपुर जिले में सक्रिय कम से कम 12 कुकी-जोमी और हमार संगठनों ने समुदायों के बीच शांति का आह्वान किया है और स्थिति की निगरानी करने तथा भविष्य में गलतफहमी को रोकने के लिए एक संयुक्त शांति समिति बनाने पर सहमति जताई है।

कुकी इंपी, हमार इंपुई और जोमी काउंसिल सहित कई संगठनों ने सांप्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करने की शपथ ली।

संयुक्त बयान में सभी प्रकार की हिंसा, घृणास्पद भाषण, संपत्ति के विनाश और आक्रामक कृत्यों की निंदा की गई है। संगठनों ने अंतर-समुदाय विवादों को बातचीत के जरिये सुलझाने की प्रतिबद्धता भी जताई है।

इन संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि चर्च और अन्य धार्मिक प्रतिष्ठानों को अपने सदस्यों से हिंसा में शामिल न होने का आह्वान करना चाहिए। बयान के मुताबिक, संयुक्त शांति समिति सभी घटनाक्रमों पर नजर रखेगी और समुदायों के बीच संभावित संघर्ष का समाधान निकालेगी।

एक अलग बयान में, चुराचांदपुर जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टिंगलोंगलेई थांगलुई ने बताया कि मंगलवार रात करीब नौ बजे भीड़ ने अस्पताल पर धावा बोल दिया और कर्मचारियों तथा मरीजों को धमकाया। उन्होंने कहा कि रात करीब 11 बजे सुरक्षा बलों के हस्तक्षेप के बाद ही स्थिति सामान्य हुई।

थांगलुई ने जनता से स्वास्थ्य देखभाल संस्थानों का सम्मान करने और अस्पताल परिसर में किसी भी तरह की हिंसा से बचने का आग्रह किया।

एक अन्य बयान में, चुराचांदपुर चिकित्सक संघ ने भी शांति का आह्वान किया और जनता से आग्रह किया कि वे चिकित्सा पेशेवरों को बिना किसी हस्तक्षेप के अपना कर्तव्य निभाने दें।

चुराचांदपुर और फेरजावल जिले के छह विधायकों ने भी शांति और सद्भाव के लिए एक संयुक्त अपील जारी की, तथा प्रशासन से कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।

विधायक पाओलिनलाल हाओकिप, एन सनाटे, एलएम खाउते, वुंगजागिन वाल्टे, चिनलुंथांग और लेतजामांग हाओकिप ने अपने बयान में हाल की घटनाओं को ‘सबसे दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया। उन्होंने चेताया कि इन घटनाक्रमों से शांति भंग हो सकती है और समुदायों के बीच एकता एवं भाईचारे को नुकसान पहुंच सकता है।

विधायकों ने रेखांकित किया कि समुदाय इस समय बेहद कठिन और नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने अधिकारों की लड़ाई में सभी के एकजुट होने की आवश्यकता पर बल दिया।

विधायकों ने सामुदायिक नेताओं और नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) से आग्रह किया कि वे शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रयास करना जारी रखें।

जोमी और हमार जनजातियों के बीच झड़पें तब शुरू हुईं, जब हमार इनपुई के महासचिव रिचर्ड हमार पर रविवार को कुछ जोमी लोगों ने हमला कर दिया, जिसके कारण हिंसा भड़क उठी और अगले दिन जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक, रिचर्ड हमार वाहन चला रहे थे और वह जोमी समुदाय के दोपहिया सवार एक व्यक्ति से टकराने से बाल-बाल बचे, जिससे दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो बढ़कर मारपीट तक पहुंच गई।

रिचर्ड हमार पर हमले और दो समुदायों के बीच झड़पों के जवाब में, हमार ग्राम स्वयंसेवकों (एचवीवी) ने फेरजावल और जिरिबाम जिले में पूर्ण बंद का आह्वान कर दिया।

फेरजावल में मुख्य रूप से हमार जनजाति निवास करती है, जबकि जिरीबाम में कई जातीय समुदाय रहते हैं, जिनमें मुख्यत: मेइती समुदाय के लोग शामिल हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि हालांकि, मंगलवार को समझौता हुआ, जिसमें हमलावर के परिवार ने पारंपरिक और प्रथागत शांति भोज आयोजित करने के लिए रिचर्ड हमार के परिजनों को 50,000 रुपये देने पर सहमति जताई।

अधिकारी के अनुसार, दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि हमलावर का परिवार शुरू में रिचर्ड हमार के इलाज के लिए दो लाख रुपये का भुगतान करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें और अधिक धनराशि प्रदान करेगा।

मणिपुर में मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच जारी जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

मुख्यमंत्री पद से एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था और राज्य विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक था।

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