देश की खबरें | आम का जलवा: फलों के राजा का आज भी दिलों पर राज कायम

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. आम का जलवा ऐसा है कि हर साल गर्मियों में पुरानी यादों को ताज़ा कर देता है। आम, कम से कम भारतीयों के लिए, एक फल से कहीं बढ़कर है, एक एहसास है, एक पारंपरिक स्वाद है, एक संस्कृति है। फिर भी, दुनिया भर में ‘‘1,400 से ज़्यादा किस्मों’’ के साथ, इसकी असली ताकत इसकी बेजोड़ विविधिता और इस्तेमाल में निहित है।

नयी दिल्ली, 13 जुलाई आम का जलवा ऐसा है कि हर साल गर्मियों में पुरानी यादों को ताज़ा कर देता है। आम, कम से कम भारतीयों के लिए, एक फल से कहीं बढ़कर है, एक एहसास है, एक पारंपरिक स्वाद है, एक संस्कृति है। फिर भी, दुनिया भर में ‘‘1,400 से ज़्यादा किस्मों’’ के साथ, इसकी असली ताकत इसकी बेजोड़ विविधिता और इस्तेमाल में निहित है।

विशेषज्ञों की मानें तो रेहड़ी-पटरी पर परोसे जाने वाले व्यंजनों से लेकर स्वादिष्ट व्यंजनों तक सभी में आम आत्मसात हो जाता है। यह हर मौसम में खुद को नया रूप देता है, और साथ ही फलों के निर्विवाद राजा के रूप में अपना स्थान बनाए रखता है।

यह कोई अकारण नहीं है कि हर साल बिना चूके, शहर में आम महोत्सव आयोजित करने की होड़ होती है, जिसमें इस प्रिय फल को उसके सभी शानदार रूपों में प्रस्तुत किया जाता है। यह एक विशेषाधिकार है जो केवल इसी फल के लिए आरक्षित है।

‘इक्क’ पंजाब के मुख्य खानसामा नरेश कोटवाल आम को सटीक तरीके से परिभाषित करते हुए कहते हैं कि यह ‘‘पुरानी यादों और नवीनता के बीच का सेतु है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह उस मेहमान की तरह है जो किसी भी समारोह में सहजता से घुल-मिल जाता है। इसका दोहरा स्वभाव - पकने पर मीठा और रसीला, कच्चे होने पर खट्टा- प्रयोग करने का अवसर देता है। कोटवाल ने हाल ही में ‘दावत-ए-आम’ का आयोजन किया था, जो आम के विभिन्न मिजाजों का उत्सव है।

इस महोत्सव में ‘आम कसौंदी पनीर टिक्का’ और ‘आम और आलू की टिक्की’ से लेकर ‘कच्चे आम का कचुम्बर’ और ‘आम लच्छा सलाद’ जैसे देसी नवाचारों के माध्यम से फल के बहुमुखी उपयोग को प्रस्तुत किया गया, जिसमें मीठे, तीखे, मसालेदार और यहां तक कि ‘स्मोकी’ स्वादों को भी शामिल किया गया।

कॉन्स्टेंस एल किर्कर और मैरी न्यूमैन द्वारा लिखित ‘‘मैंगो: ए ग्लोबल हिस्ट्री’’ के अनुसार भारत ने अकेले 2020 में दुनिया के लगभग आधे आमों का उत्पादन किया जो 2.4 करोड़ टन से अधिक था। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के आंकड़ों का हवाले से दी गई है।

किताब के मुताबिक भारी उत्पादन के बावजूद केवल 1,73,000 टन का निर्यात किया गया, जिसमें से लगभग 30 प्रतिशत संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को भेजा गया।

लेकिन आम सिर्फ राष्ट्रीय जुनून नहीं है, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप से दुनिया को मिला यह उपहार सीमाओं और व्यंजनों के पार भी खूबसूरती से फैला है। थाई मैंगो स्टिकी राइस से लेकर मैक्सिकन मैंगो चिली लाइम साल्ट व्यंजन इसके उदाहरण है।

भारतीय आमों के साथ वैश्विक स्वादों का यह मिश्रण अब उच्च श्रेणी के रेस्तरांओं में एक प्रमुख व्यंजन बन गया है।

नयी दिल्ली स्थित ताज महल होटल के मुख्य खानसामा कौशिक मिश्रा बताते हैं कि आम में ‘‘चीनी और अम्लता का अंतर्निहित संतुलन’’ इसे तीखे मसालों, जड़ी-बूटियों और यहां तक कि डेरी उत्पादों के साथ भी पूरक बनाने में मदद करता है।

मिश्रा की भावनाओं को दिल्ली स्थित इंडियन एक्सेंट के कार्यकारी शेफ शांतनु मेहरोत्रा भी साझा करते हैं।

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