नयी दिल्ली, 11 जुलाई केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की दवा कंपनियों से स्व-नियमन के माध्यम से अच्छी विनिर्माण गतविधियां अपनाने को कहा है। मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
उद्योग संगठन आईडीएमए (इंडियन ड्रग मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में मंत्री ने कहा कि एमएसएमई दवा कंपनियों के लिए अनुसूची एम को जल्द ही अनिवार्य बनाया जाएगा।
भारत के औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के अनुसार, अनुसूची एम अच्छी विनिर्माण गतिविधियों को संदर्भित करता है जिनका विनिर्माण संयंत्रों को पालन करना चाहिए।
मांडविया ने कहा, ‘‘एमएसएमई फार्मा कंपनियों के लिए दवाओं की गुणवत्ता के प्रति सतर्क रहना और स्व-नियमन के माध्यम से अच्छी विनिर्माण गतिविधियों (जीएमपी) की ओर तेजी से बढ़ना महत्वपूर्ण है।’’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक दवा उद्योग में देश की स्थिति का कारण गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर ध्यान देना है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाना चाहिए कि हम मूल्य और गुणवत्ता के मामले में इस स्थिति को मजबूत करें। इसलिए, स्व-नियमन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।’’
उद्योग प्रतिनिधियों के आश्वासन के आधार पर, मांडविया ने कहा कि अनुसूची एम को चरणबद्ध तरीके से एमएसएमई फार्मा क्षेत्र के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे गुणवत्ता में मदद मिलेगी और अनुपालन बोझ भी कम होगा।’’
मांडविया ने कहा कि उन्होंने भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को नकली दवाएं बनाने वाली सभी दवा विनिर्माता कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत में निर्मित दवाओं की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।’’
मांडविया ने कहा कि दवा उत्पादों की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियामक अधिकारियों ने संयंत्रों का जोखिम-आधारित निरीक्षण और अंकेक्षण शुरू किया है। उन्होंने कहा कि 137 कंपनियों का निरीक्षण किया गया और 105 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY