विदेश की खबरें | मलेशिया की अपीलीय अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में नजीब रज्जाक की सजा बरकरार रखी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. पुत्राजाया (मलेशिया), आठ दिसंबर (एपी) मलेशिया की अपीलीय अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक को 1एमडीबी राजकोष से लाखों डॉलर के गबन के जुर्म में सुनाई गई 12 साल की जेल की सजा बुधवार को बरकरार रखी। इस मामले के चलते 2018 में नजीब रज्जाक की सरकार गिर गयी थी।

पुत्राजाया (मलेशिया), आठ दिसंबर (एपी) मलेशिया की अपीलीय अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री नजीब रज्जाक को 1एमडीबी राजकोष से लाखों डॉलर के गबन के जुर्म में सुनाई गई 12 साल की जेल की सजा बुधवार को बरकरार रखी। इस मामले के चलते 2018 में नजीब रज्जाक की सरकार गिर गयी थी।

उच्च न्यायालय ने 1एमडीबी की पूर्व ईकाई एसआरसी इंटरनेशनल से 90.9 लाख डॉलर अवैध रूप से लेने के लिए जुलाई 2020 में नजीब को सत्ता के दुरुपयोग, आपराधिक विश्वास भंग और धन शोधन का दोषी ठहराया था और उन्हें 12 साल की जेल की सजा सुनाई थी।

अपीलीय अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने जूम से की गयी सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया। बचाव पक्ष के एक वकील के कोविड-19 से संक्रमित होने के संदेह के कारण जूम से मामले पर सुनवाई की गयी।

अपीलीय अदालत के न्यायाधीश अब्दुल करीम अब्दुल जलील ने कहा, ‘‘कुल मिलाकर हमें सजा जायज लगी। हम अपील खारिज करते हैं...और सभी सात आरोपों पर उच्च न्यायालय द्वारा सुनाई सजा बरकरार रखते हैं।’’

फैसला सुनाए जाने के दौरान नजीब निराश दिखाई दिए और वह संघीय अदालत में इस फैसले को अब भी चुनौती दे सकते हैं। वह देश की शीर्ष अदालत है। तब तक नजीब जमानत पर बाहर रहेंगे।

नजीब ने 2009 में प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद 1एमडीबी कोष की स्थापना की थी। उन्होंने कुछ भी गलत करने से इनकार किया है और कहा कि उनके खिलाफ आरोप राजनीतिक हैं। वह अभी सिंगापुर से लौटे हैं। अदालत ने पहले उन्हें अपनी बेटी के साथ सिंगापुर जाने की अनुमति दी थी। उनकी बेटी ने हाल में बच्चे को जन्म दिया है।

भ्रष्टाचार के मामले में सजा सुनाए जाने के बावजूद नजीब (68) अब भी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं। अपीलीय अदालत के न्यायाधीश अब्दुल करीम ने कहा कि नजीब ने स्पष्ट तौर पर घूस के बदले में एसआरसी को अरबों का सरकारी कर्ज दिलाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें यहां कोई राष्ट्रीय हित नहीं है केवल राष्ट्रीय शर्मिंदगी है।’’

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