नयी दिल्ली, 26 दिसंबर संसद की एक समिति ने सरकार से कश्मीर के ऐसे शिकारा मालिकों के लिये पुनर्वास नीति तैयार करने की सिफारिश की है जो अपना पारंपरिक कारोबार छोड़कर आजीविका का वैकल्पिक अवसर तलाश करना चाहते हैं।
संसद में हाल ही में पेश गृह मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।
शिकारा एक प्रकार की नौका होती है जो कश्मीर में डल झील सहित कई जलाशयों में तैरते हुए एक गेस्ट हाउस के रूप में उपयोग में लायी जाती है। अधिकांश शिकारा में मोटर नहीं लगी होती है और वे किसी स्थान पर स्थिर रहते हैं । इनका निर्माण देवदार की लकड़ी से होता है जो पानी में आसानी से खराब नहीं होती।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘ समिति यह सिफारिश करती है कि ऐसे शिकारा मालिकों के लिये पुनर्वास नीति तैयार की जा सकती है जो शिकारा का कारोबार छोड़ना चाहते हैं।’’
समिति ने इस बात को नोट किया है कि सरकार रियायती दर पर शिकारा के पुनर्निर्माण के लिये नौका मालिकों को लकड़ी उपलब्ध कराने संबंधी एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
प्रशासनिक परिषद की इस वर्ष 8 जून में हुई बैठक में नौका एवं शिकारा मालिकों को नौकाओं के पुनर्निर्माण के लिये रियायती दर पर देवदार की लकड़ी उपलब्ध कराने को मंजूरी प्रदान किये जाने के बाद उक्त मांग पूरी हो गई है।
समिति ने इस बात की सराहना की कि सरकार ने रियायती दर पर लकड़ी प्रदान करने की शिकारा मालिकों की मांग को पूरा किया है।
हालांकि, समिति की उस सिफारिश को पूरा नहीं किया गया जिसमें उसने कहा था कि जो शिकारा मालिक यह कारोबार छोड़ना चाहते हैं, उनके लिये पुनर्वास नीति तैयार की जाए।
ऐसे में समिति ने एक बार फिर यह दोहराया है कि सरकर, कश्मीर के ऐसे शिकारा मालिकों के लिये पुनर्वास नीति तैयार करे जो अपना पारंपरिक कारोबार छोड़कर आजीविका का वैकल्पिक अवसर तलाश करना चाहते हैं।
दीपक
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