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जरुरी जानकारी | मध्यप्रदेश 1.27 करोड़ टन गेहूं खरीद के साथ देश में प्रथम स्थान पर पहुँचा

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जरुरी जानकारी | मध्यप्रदेश 1.27 करोड़ टन गेहूं खरीद के साथ देश में प्रथम स्थान पर पहुँचा

भोपाल, आठ जून न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 1.27 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ की खरीद कर मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुँच गया है।

मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया, ''समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर पहुँच गया है। मध्यप्रदेश में अभी तक 1,27,67,628 मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया है। देश के सभी राज्यों द्वारा कुल गेहूँ खरीद का 33 प्रतिशत मध्यप्रदेश में की गई है। पंजाब दूसरे स्थान पर है।''

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उन्होंने बताया कि पूरे देश में 3,86,54,000 मीट्रिक टन गेहँ का उपार्जन किया गया है।

अधिकारी ने बताया कि गत वर्ष की तुलना में मध्यप्रदेश में गेहूँ उपार्जन में 74 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष मध्यप्रदेश में 73.69 लाख गेहूँ का उपार्जन समर्थन मूल्य पर किया गया था।

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उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गेहूँ उपार्जन के प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री ने 23 मार्च से लगातार 75 बैठकें कर गेहूँ उपार्जन की प्रतिदिन समीक्षा की। कोरोना वायरस के लिए लगे लॉकाडाउन एवं निसर्ग तूफान के अवरोध को पीछे छोड़ते हुए उपार्जन कार्य में लगा अमला कोरोना योद्धा और मध्यप्रदेश के किसान कोरोना विजेता सिद्ध हुए है।

मुख्यमंत्री चौहान ने इस उपलब्धि के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की टीम और प्रदेश के किसानों को बधाई दी है।

अधिकारी ने बताया, ''मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूँ उपार्जन के लिए प्रभावी रणनीति बनाई। पिछले वर्ष किये गये उपार्जन से बढ़कर 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित करते हुए बारदानों और भण्डारण की व्यवस्था की गई।''

अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के बावजूद 25 लाख मीट्रिक टन के लिए अतिरिक्त बारदानों की व्यवस्था की गई। बारदानों के सुनियोजित प्रबंधन के फलस्वरूप लक्ष्य से अधिक इतनी बड़ी खरीदी होने के बाद भी बारदानों की कमी नहीं होने दी गई। लॉकडाउन में ही कार्य करते हुए 10 लाख मीट्रिक टन के लिए भंडारण की अतिरिक्त व्यवस्था की गई।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती ज्यादा किसानों से कम अवधि में ज्यादा उपार्जन करना था। इसके लिए पिछले वर्ष उपार्जन केन्द्रों की संख्या 3,545 को बढाकर 4,529 केन्द्र खोले गये। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए किसानों को एसएमएस भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई ताकि एसएमएस प्राप्त किसान ही खरीदी केन्द्र पहुँचें।

अधिकारी ने बताया कि सही समय पर खरीदी पूर्ण करने की चुनौती को देखते हुए पहली बार यह सुविधा दी गई कि कलेक्टर स्वयं एक-एक केन्द पर एसएमएस संख्या निर्धारित कर सकें। किसानों को कोरोना के प्रति सजग रहने और अन्य जानकारी देने के लिए 75 लाख एसएमएस भेजे गए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा गेहूँ उपार्जन की राशि सीधे किसानों के खातों में औसतन 7 दिवस में अंतरित की गई। अभी तक 14.19 लाख किसानों के खातों में 20,253 करोड़ रूपये की राशि भेजी जा चुकी है। किसानों को समय से भुगतान हो सके, इसके लिए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था उपार्जन अवधि के पूर्व ही सुनिश्चित की गई। जिससें कभी भी किसानों को भुगतान में विलंब की स्थिति निर्मित नहीं हुई।

अधिकारी ने बताया कि उपार्जित गेहूँ के भंडारण और परिवहन की चुनौती का भी सफलता पूर्वक सामना किया गया। कुल उपार्जित गेहूँ में से 118 लाख मीट्रिक टन का परिवहन कर सुरक्षित भंडारण किया जा चुका है, जो कि खरीदी मात्रा का लगभग 95 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि इस बार जितने किसानों ने पंजीयन कराया था उनमें से 81 प्रतिशत गेहूँ बेचने के लिए उपार्जन केन्द्रों पर आये जो अपने आप में एक रिकार्ड है।

रावत

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 08, 2020 07:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).