देश की खबरें | मप्र उच्च न्यायालय ने मंत्री शाह के खिलाफ प्राथमिकी को बताया 'घोर धोखाधड़ी'

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में मंत्री विजय शाह की आपत्तिजनक टिप्पणी पर अदालत के आदेश के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी को लेकर बृहस्पतिवार को पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि यह राज्य सरकार की ओर से 'घोर धोखाधड़ी' जैसा है।

जबलपुर, 15 मई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में मंत्री विजय शाह की आपत्तिजनक टिप्पणी पर अदालत के आदेश के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी को लेकर बृहस्पतिवार को पुलिस को फटकार लगाई और कहा कि यह राज्य सरकार की ओर से 'घोर धोखाधड़ी' जैसा है।

अदालत ने कहा कि पुलिस को प्राथमिकी में कथित अपराधों के व्यापक विवरण शामिल होने चाहिए और यह उच्च न्यायालय के बुधवार के आदेश के अनुरूप होना चाहिए।

मप्र उच्च न्यायालय ने कहा कि वह जांच में हस्तक्षेप किए बिना मामले की निगरानी करेगा। अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 16 जून की तारीख मुकर्रर की है।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने पिछले आदेश के अनुपालन के मद्देनजर उनके समक्ष रखे गए मामले में कहा कि मौजूदा स्वरूप में प्राथमिकी को चुनौती दिए जाने पर रद्द किया जा सकता है।

अदालत ने कहा, "यह प्राथमिकी इस तरह से दर्ज की गई कि इसमें पर्याप्त गुंजाइश है ताकि अगर इसे चुनौती दी जाती है तो इसे रद्द किया जा सके, क्योंकि इसमें उन कार्यों के भौतिक विवरण की कमी है, जो प्रत्येक विशिष्ट अपराध का गठन करते हैं। यह राज्य की ओर से घोर धोखाधड़ी है।"

पीठ ने कहा कि इस मौके पर अदालत यह पता लगाने का प्रयास नहीं कर रही है कि इस 'बेढंगे प्रयास' के लिए राज्य पुलिस की कमान में कौन जिम्मेदार है।

पीठ ने कहा कि यह अदालत भविष्य की कार्यवाही में इसका पता लगाने का प्रयास करेगी।

न्यायाधीशों ने कहा कि मामले की प्रकृति और प्राथमिकी कैसे दर्ज की गई है, इससे अदालत का विश्वास पैदा नहीं होता है।

पीठ ने कहा कि अदालत की राय है कि अगर उचित निगरानी नहीं की गई तो पुलिस न्याय के हित में निष्पक्ष रूप से मामले की जांच नहीं करेगी।

अदालत ने कहा, "इन परिस्थितियों में, यह न्यायालय यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूर महसूस करता है कि वह जांच एजेंसी की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप किए बिना जांच की निगरानी करे। निगरानी इसलिए कि यह किसी भी बाहरी दबाव या निर्देशों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार निष्पक्ष रूप से कार्य करे।"

अदालत ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की जब जनजातीय मामलों के मंत्री शाह ने अपने खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के उच्च न्यायालय के निर्देश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया। शीर्ष अदालत शुक्रवार को उनकी याचिका पर सुनवाई करेगी।

उच्च न्यायालय ने बुधवार को मंत्री के विवादास्पद बयानों पर स्वत: संज्ञान लिया था।

शाह के खिलाफ इंदौर जिले में बुधवार रात भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कृत्य), 196 (1) (बी) (समुदायों के बीच आपसी सौहार्द को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाला कार्य, जिससे सार्वजनिक अशांति होने की संभावना हो) और 197 (1) (सी) (सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले समुदाय के किसी सदस्य को लक्षित करने वाला बयान) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

कर्नल कुरैशी ने विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ मिल कर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' का विवरण नियमित पत्रकार वार्ताओं में साझा करती थीं । इन पत्रकार वार्ताओं में विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी शामिल होते थे।

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