देश की खबरें | लखनऊ ने की थी 1926 में आईएचआरसी के नौवें सत्र की मेजबानी, 1962 में नहीं हो सका था सत्र

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(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, 19 दिसंबर भारतीय ऐतिहासिक अभिलेख आयोग (आईएचआरसी) के नौवें सत्र की मेजबानी लखनऊ ने दिसंबर 1926 में की थी, जबकि "चीनी आक्रामकता" के कारण 1962 में पुणे में आयोजित होने वाले सत्र का आयोजन उस साल नहीं हो सका था। अभिलेखीय दस्तावेजों से यह जानकारी सामने आई है।

इस बार भी लखनऊ ने उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार में 18-19 दिसंबर को आईएचआरसी के 63वें सत्र की मेजबानी की, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों के कई विद्वानों द्वारा कई अकादमिक पेपर भी प्रस्तुत किए गए हैं।

आईएचआरसी अभिलेखों के रचनाकारों, संरक्षकों और उपयोगकर्ताओं का एक अखिल भारतीय मंच है, जिसकी स्थापना 1919 में अभिलेखों के प्रबंधन और ऐतिहासिक अनुसंधान के लिए उनके उपयोग से जुड़े सभी मुद्दों पर सरकार को सलाह देने के लिए की गई थी।

नयी दिल्ली स्थित भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) आईएचआरसी का सचिवालय है।

एनएआई में रखे अभिलेखीय दस्तावेजों के अनुसार, आईएचआरसी का पहला सत्र 19-20 जून 1919 को शिमला में आयोजित किया गया था और इसके अध्यक्ष भारत सरकार के शिक्षा सचिव एच. शार्प थे।

राष्ट्रीय अभिलेखागार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर आयोग के शुरुआती वर्षों में आयोजित कुछ सत्रों से संबंधित मूल दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां भी साझा की हैं।

एनएआई ने आईएचआरसी के 62वें सत्र की कार्यवाही के पुराने दस्तावेज़ भी साझा किए हैं, जिनमें 2018 तक आयोजित सत्रों की सूची का उल्लेख है। इसका 62वां सत्र 10-11 जुलाई, 2018 को हैदराबाद में आयोजित किया गया था।

सूची के अनुसार आईएचआरसी का दूसरा सत्र 1920 में लाहौर में, तीसरा 1921 में बंबई (अब मुंबई) में, चौथा सत्र दिल्ली में 1922 में, पांचवां कलकत्ता (अब कोलकाता) में 1923 में, छठा मद्रास (अब चेन्नई) में 1924 में, सातवां सत्र 1925 में पूना (अब पुणे) में आयोजित किया गया था।

आईएचआरसी का 36वां सत्र 1961 में चंडीगढ़ में और उसके बाद का सत्र 1966 में दिल्ली में आयोजित किया गया था।

सूची साझा करने वाले दस्तावेज में एक फुटनोट में उल्लेख किया गया है कि "1962 में तत्कालीन पूना में आयोजित होने वाला 37वां सत्र राष्ट्रीय आपातकाल (चीनी आक्रमण) के कारण आयोजित नहीं किया जा सका था। इसका 37वां अधिवेशन 1966 में दिल्ली में हुआ था।

एनएआई के महानिदेशक चंदन सिन्हा ने रविवार को अभिलेखागार के विकास पर एक रिपोर्ट पेश की। दो-दिवसीय इस आयोजन में विद्वानों द्वारा कुल 24 अकादमिक पेपर प्रस्तुत किए जाने थे, जिनमें से कुछ रविवार को आयोजित शैक्षणिक सत्र के दौरान प्रस्तुत किए गए। एनएआई के संग्रह से मूल अभिलेखीय स्रोतों पर आधारित 'सागा ऑफ फ्रीडम: नोन एंड लेसर-नोन स्ट्रगल' शीर्षक वाली एक महीने लंबी प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया।

अधिकारियों ने कहा कि सोमवार सुबह प्रतिनिधियों के लिए एक शैक्षणिक सत्र के बाद हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया।

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