नागपुर, सात जुलाई बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने कहा है कि गुलाबी रंग में तब्दील हो गयी लोनार झील की स्थिति बहुत खराब और दयनीय है ।
अदालत ने झील और उसके आसपास के क्षेत्र के संरक्षण एवं सुरक्षा के प्रति ‘संवेदनहीन और उदासीन रवैये’ को लेकर बुलढाणा के जिलाधिकारी और लोनार निगम परिषद की खिंचाई की।
महाराष्ट्र के बुलढाणा में लोनार झील एक लोकप्रिय पर्यटक केंद्र है। करीब 50000 साल पहले पृथ्वी पर एक धूमकेतु के टकराने से यह अंडाकार झील बनी थी।
हाल ही में इस झील का पानी गुलाबी हो गया जिससे स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमी और वैज्ञानिक भी चकित हैं।
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न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने सोमवार को कीर्ति निपांकर की याचिका पर सुनवाई के दौरान झील का रंग बदलने पर चिंता प्रकट की है।
पिछले महीने, अदालत ने राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान को इस झील पर पर्यावरणीय प्रभाव आकलन करने का निर्देश दिया था।
पीठ ने अदालत द्वारा नियुक्त समिति को इसका निरीक्षण समेत कई अन्य निर्देश भी दिये थे और बुलढाणा के जिलाधिकारी एवं लोनार निगम परिषद के प्रमुख अधिकारी को झील के आसपास के क्षेत्र का संरक्षण सुनिश्चित करने को कहा था।
अदालत द्वारा नियुक्त समिति की रिपोर्ट पर सोमवार को गौर करते हुए पीठ ने सोमवार को कहा कि झील की स्थिति वाकई दयनीय है।
पीठ ने कहा कि बुलढाणा के जिलाधिकारी एवं लोनार निगम परिषद ने पिछले महीने दिये गये निर्देशों का पालन नहीं किया है।
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