ताजा खबरें | लोकसभा ने फेक्टर विनियमन संशोधन विधेयक को मंजूरी दी
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नयी दिल्ली, 26 जुलाई विपक्षी सदस्यों के शोर शराबे के बीच लोकसभा ने सोमवार को ‘फेक्टर विनियमन (संशोधन) विधेयक 2020’ को मंजूरी दे दी जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को रिण सुविधा प्राप्त करने के लिये अतिरिक्त रास्ते सुलभ कराने का प्रस्ताव किया गया है।
निचले सदन में विधेयक को सदन से पारित करने की अपील करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2011 के कानून में सरकार कुछ संशोधन कर रही है। यू के सिन्हा समिति की सिफारिशों के आधार पर विधेयक में तीन संशोधन लाये गए है।
उन्होंने कहा कि 14 सितंबर, 2020 में इस विधेयक को पेश किया गया था। 24 सितंबर को इसे स्थायी समिति को भेजा जाएगा। स्थायी समिति की सभी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया है।
वित्त मंत्री ने सदस्यों से कहा, ‘‘ एमएसएमएई को इससे लाभ मिलेगा । मैं अपील करती हूं कि आप लोग इस संशोधन विधेयक को पारित करें।’’
शोर शराबे के बीच ही निचले सदन ने ‘फेक्टर विनियमन (संशोधन) विधेयक 2020’ को मंजूरी दे दी ।
ज्ञात हो कि पेगासस जासूसी मामला, तीन केंद्रीय कृषि कानून एवं अन्य मुद्दे को विपक्षी सदस्य पिछले एक सप्ताह से संसद में जोरदार ढंग से उठा रहे हैं जिसके कारण कामकाज बाधित रहा है ।
इसके माध्यम से फैक्टर विनियमन अधिनियम 2011 में संशोधन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि जब एक पक्ष अपनी प्राप्तियां, जिनका भुगतान अभी नहीं किया गया है, उसे किसी दूसरे पक्ष को बेच देता है तो उसे फैक्टरिंग कहा जाता है।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि इस बारे में वर्ष 2019-20 तथा वर्ष 2020-21 के बजट संबोधन में घोषणा की गई थी ।
इन संशोधनों के माध्यम से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों की प्रत्यय सुविधा प्राप्त करने के लिये और रास्ते उपलब्ध कराकर, खासतौर पर व्यापार से प्राप्त होने वाली आय के माध्यम से सहायता प्रदान करने की बात कही गई है।
इसमें कहा गया है कि इसके तहत कार्यशील पूंजी की उपलब्धता में वृद्धि से सूक्ष्म, लधु और मध्यम उपक्रमों से जुड़े क्षेत्र के कारोबार में वृद्धि और देश में रोजगार को बढ़ावा मिल सकेगा। इसमें अन्य बातों के अलावा ‘प्रेषण’, ‘फैक्टर कारोबार’ और ‘प्राप्तव्यों’ की परि में संशोधन करने की बात कही गई है ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की परि के अनुरूप लाया जा सके ।
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