ताजा खबरें | लोकसभा ने त्रिपुरा से संबंधित संविधान अनुसूचित जनजातियां आदेश संशोधन विधेयक को मंजूरी दी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को कहा कि मोदी सरकार का मानना है कि जनजाति एवं जनजातीय क्षेत्रों के विकास के बिना देश के समग्र विकास का सपना पूरा नहीं हो सकता है, ऐसे में मानव विकास सूचकांक के सभी मानकों के आधार पर इनके लिये प्रतिबद्धता के साथ काम किया जा रहा है।

नयी दिल्ली, 28 मार्च जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने सोमवार को कहा कि मोदी सरकार का मानना है कि जनजाति एवं जनजातीय क्षेत्रों के विकास के बिना देश के समग्र विकास का सपना पूरा नहीं हो सकता है, ऐसे में मानव विकास सूचकांक के सभी मानकों के आधार पर इनके लिये प्रतिबद्धता के साथ काम किया जा रहा है।

मुंडा ने त्रिपुरा राज्य से संबंधित ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022’ पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही।

केंद्रीय मंत्री मुंडा ने कहा, ‘‘भारत सरकार जनजातियों के विकास के लिये प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने लगातार इस दिशा में काम किया है।’’

उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि जनजाति एवं जनजातीय क्षेत्रों के विकास के बिना देश के समग्र विकास का सपना पूरा नहीं हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार मानव विकास सूचकांक के सभी मानकों के आधार पर जनजाति विकास के लिये काम कर रही है।

मुंडा ने कहा कि 2014 में सरकार बनने के बाद से ही धन, निर्णय, कार्यक्रम एवं इनके कार्यान्वयन की दृष्टि से राज्यों के साथ विभिन्न स्तर पर समन्वय करके काम किया जा रहा है और राज्यों को आवंटित राशि में वृद्धि की गई है।

उन्होंने कहा कि हमने राज्यों को प्रेरित किया है कि अनुसूचित जाति/जनजाति उप योजना पर अच्छे तरीके से काम करें।

मंत्री के जवाब के बाद निचले सदन ने त्रिपुरा राज्य से संबंधित ‘संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022’ को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

मुंडा ने कहा कि किसी राज्य में जनजातियों का निर्धारण लोकुर समिति द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर होता है। राज्य सरकार इन मानकों के आधार पर इन्हें चिन्हित करके केंद्र के पास भेजती है। केंद्र सरकार के स्तर पर विचार-विमर्श करने के बाद उपयुक्त पाए जाने पर इन्हें मंत्रिमंडल के पास भेजा जाता है।

उन्होंने कहा कि वह सदस्यों को बताना चाहते हैं कि सरकार इस विषय पर संवेदनशील है।

गौरतलब है कि इससे पहले विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने केंद्र सरकार से देश में विभिन्न समुदायों को जनजातियों की सूची में शामिल करने से संबंधित अलग-अलग विधेयक लाने के बजाय एक समग्र विधेयक लाने की मांग की थी।

दीपक वैभव

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