ताजा खबरें | लोकसभा ने संविधान अनुसूचित जातियां आदेश संशोधन विधेयक 2021 को मंजूरी दी
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नयी दिल्ली, 19 मार्च लोकसभा ने शुक्रवार को संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश संशोधन विधेयक 2021 को मंजूरी दे दी जिसमें तमिलनाडु की सात जातियों को एक जाति देवेन्द्रकुला वेलालर में समाहित करने का प्रस्ताव किया गया है।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों के अनुसार, तमिलनाडु राज्य सरकार ने सात जातियों देवेन्द्रकुलथन, कडड्यन (कुछ जिलों के तटीय क्षेत्रों को छोड़कर), कल्लादि, कुडुम्बन, पल्लन, पन्नाडी, वातिरैयान को देवेन्द्रकुला वेलालर समूह के तहत लाने का प्रस्ताव किया है।
ये जातियां राज्य में अनुसूचित जाति के तहत आती हैं। उक्त परिवर्तनों को प्रभावी बनाने के लिये तमिलनाडु राज्य के संबंध में संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश को संशोधित करना आवश्यक है।
लोकसभा में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि इनमें से कडड्यन जाति को तिरूनेलवेली, तूतुकुडी , रामनाथपुरम, पुदुकोट्टई और तंजावूर जिलों के तटीय क्षेत्रों में इसी नाम से जाना जायेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ इस विधेयक के माध्यम से तमिलनाडु की सात जातियों को एक जाति देवेन्द्रकुला वेलालर में समाहित करने का प्रस्ताव किया गया है।’’
विधेयक में सात जातियों के नाम का लोप नहीं करने पर स्थिति स्पष्ट करते हुए गहलोत ने कहा कि ये सात जातियां ऐसी हैं जिनके प्रमाणपत्र अनेक वर्षों से बनाए गए हैं, ये प्रमाणपत्र निरर्थक नहीं हो जाएं, इसलिये इन जातियों के नाम का उल्लेख किया गया।
मंत्री ने कहा कि इसके कारण किसी को न कोई आर्थिक लाभ देय होगा और न ही सरकार पर कोई वित्तीय प्रभाव पड़ेगा।
मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने ध्वनिमत से संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश संशोधन विधेयक 2021 को मंजूरी दे दी।
गहलोत ने अनुसूचित जातियों एवं समाज के कमजोर वर्ग के लोगों की सुरक्षा एवं उनके सशक्तीकरण की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ऐसे अनेक निर्णय किये गए जिससे देश में सामाजिक समरसता आई और कमजोर वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया।
उन्होंने कहा कि 1989 के अनुसूचित जातियां अपराध निवारण अधिनियम में कुछ खामियां आईं तब साल 2015 में इसमें संशोधन किया गया और इसमें 22-23 नये अपराधों को जोड़कर इस कानून को सशक्त बनाने का काम किया।
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि इसके तहत एक नया फार्मूला तय किया गया है जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र द्वारा देने और 40 प्रतिशत राशि राज्य द्वारा देना तय किया गया है। इस फार्मूले के तहत अब हर साल इस योजना में 5,000 करोड़ रूपये दिये जाएंगे। इसका 4 करोड़ छात्रों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने अनुसूचित जातियों के लिये बजट में अधिक आवंटन किये जाने का भी उल्लेख किया।
इससे पहले विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के गुरजीत सिंह औजला और अमर सिंह ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु विधानसभा नजदीक होने की वजह से सरकार यह विधेयक अब लेकर आई है जिसे बहुत पहले पारित हो जाना चाहिए था।
औजला ने कहा कि देश में सबसे ज्यादा अपराध दलित महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हो रहे हैं, इस पर सरकार को कुछ करना चाहिए।
शिवसेना के राहुल शेवाले ने कहा कि जिस तरह तमिलनाडु के लोगों को इस विधेयक के माध्यम से न्याय दिया जा रहा है, उसी तरह महाराष्ट्र को न्याय मिलना चाहिए और मराठा समुदाय को आरक्षण के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए।
चर्चा में जदयू के विजय कुमार, बसपा के गिरीश चंद्र, तेलंगाना राष्ट्र समिति के पी रामुलू, राकांपा के सुनील तटकरे, भाजपा के उमेश जाधव, कांग्रेस के अमर सिंह, भाजपा के वीरेंद्र कुमार, एआईएमआईएम के इम्तियाज जलील, भाजपा की रीता बहुगुणा जोशी और वाईएसआर कांग्रेस की जी माधवी ने भाग लिया।
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