लॉकडाउन : यमुना डूब क्षेत्र में रहने वाले खेतिहर मजदूरों की चिंता बढ़ी
सड़क संपर्क की कमी और रोजमर्रा की चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर होने के कारण उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है।
नयी दिल्ली, 17 अप्रैल कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के कारण यमुना डूब क्षेत्र में रहने वाले करीब 40-50 खेतिहर मजदूरों का दुनिया से सम्पर्क टूट गया है और अब खाना लेकर आने वाली नौका के इंतजार में वे अपने दिन काट रहे हैं।
सड़क संपर्क की कमी और रोजमर्रा की चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर होने के कारण उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है।
चिल्ला गांव के निवासी सोनू पंडित ने बताया कि करीब 40-50 खेतिहर मजदूरों का दुनिया से पूरी तरह सम्पर्क टूट गया है और केवल नौकाओं के जरिए ही उन तक पहुंचा जा सकता है।
अपने चार भाईयों के साथ खेतों में मजदूरी करने वाले शिव कुमार (25) ने कहा, ‘‘ मेरे परिवार को मिलाकर वहां करीब 15 से 50 परिवार हैं, जिन्हें नौकाओं द्वारा लाया खाना मिलता है। जिंदगी हमारे लिए पहले ही मुश्किल थी , जिसे लॉकडाउन ने बदतर बना दिया है।’’
मयूर विहार के वीरेंद्र सचदेव, उनके दोस्तों राजीव कोहली और विजेंद्र धामा द्वारा संचालित ‘सेवा रसोई’ द्वारा लॉकडाउन के दौरान इन खेतिहर मजदूरों को खाना पहुंचाया जा रहा है।
भाजपा की मयूर विहार इकाई के पूर्व अध्यक्ष सचदेव ने कहा, ‘‘ हमें यमुना डूब क्षेत्र में रहने वाले लोगों की अवस्था के बारे में पता चला। एक नौका के जरिए रोजाना उन तक खाने के 200 पैकेट पहुंचाए जाते हैं।’’
खेतिहर मजदूर अब्दुल ने बताया कि वह खाने के लिए पूरी तरह अपनी दिहाड़ी पर निर्भर रहते हैं और लॉकडाउन की घोषणा के बाद खाने को लेकर उनकी चिंता बढ़ गई थी।
उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन सौभाग्य से , हमें भोजन के पैकेट मिल रहे हैं और कभी-कभी ‘सेवा भारती’ से सूखा राशन भी मिल जाता है। हम चीजें आस-पास के इलाकों से खरीदते थे लेकिन लॉकडाउन की वजह से वे बंद हैं। हम पानी हनुमान मंदिर के पास बने टैंकर से लेते हैं।’’
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 17, 2020 05:04 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

