विदेश की खबरें | सतत विकास लक्ष्यों का स्थानीयकरण 2030 का एजेंडा हासिल करने के लिए अनिवार्य : भारत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के 2030 एजेंडे को हासिल करने के लिए इसके स्थानीयकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत ने कहा कि सभी परिस्थितियों में कोई एक बात उचित नहीं है बल्कि देश निश्चित तौर पर अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे से सीख सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र, नौ जुलाई सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के 2030 एजेंडे को हासिल करने के लिए इसके स्थानीयकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारत ने कहा कि सभी परिस्थितियों में कोई एक बात उचित नहीं है बल्कि देश निश्चित तौर पर अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे से सीख सकते हैं।

‘‘एसडीजी के स्थानीयकरण से कैसे कोई भी पीछे नहीं छूट सकता?’’, विषय पर उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच पर बोलते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारतीय के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने कहा कि स्थानीयकरण के प्रयासों के कारण कोविड-19 वैश्विक महामारी के बावजूद 2030 एजेंडे को लागू करने की राह आसान हो जाएगी।

उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘1.3 अरब की आबादी वाले भारत जैसे बड़े देशों में 2030 के एजेंडे के सफल होने के लिए एसडीजी का स्थानीयकरण अनिवार्य है।’’ तिरुमूर्ति ने कहा कि लक्ष्यों को टुकड़ों में बांटना और उप राष्ट्रीय तथा स्थानीय स्तरों पर कार्यान्वयन ही एकमात्र तरीका है जिससे एसडीजी लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। स्थानीयकरण से प्रांतीय तथा स्थानीय स्तरों पर सरकार को सशक्त बनाकर स्थानीय चुनौतियों का स्थानीय समाधान तलाशने में भी मदद मिलती है।

उन्होंने कहा, ‘‘स्थानीयकरण के लिए सभी परिस्थितियों के लिहाज से कोई एक बात उचित नहीं है, बल्कि हम अनुभव साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे से सीख सकते हैं।’’

तिरुमूर्ति ने कहा कि वैश्विक महामारी से ‘‘कार्रवाई के दशक’’ को बाधित करने का खतरा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी देश खासतौर से कमजोर देश 2030 एसडीजी एजेंडा हासिल करने के अपने लक्ष्य पर कायम रह सकें।’’

भारतीय राजदूत ने कहा कि भारत में एसडीजी के कार्यान्वयन के लिए समग्र समन्वय नीति आयोग संभालता है। उन्होंने कहा कि एसडीजी की स्थानीयकरण प्रक्रिया केवल सरकार के हस्तक्षेप तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें सिविल सोसायटी के संगठन भी शामिल हैं।

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