LIVE: 12 जनवरी की बड़ी खबरें और अपडेट्स

भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.जर्मन चांसलर मैर्त्स की भारत यात्रा शुरू, कूटनीति, रक्षा, तकनीक और साझेदारी पर फोकस.

PSLV रॉकेट उड़ान पथ से भटका, इसरो ने कहा: डेटा का विश्लेषण जारी

दिल्ली में कड़ाके की ठंड, न्यूनतम तापमान 3 डिग्री

डॉनल्ड ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का 'कार्यवाहक राष्ट्रपति' घोषित किया

मलेशिया और इंडोनेशिया ने मस्क के 'ग्रोक' एआई पर लगाया प्रतिबंध

ऑस्ट्रेलिया के नए कानून का असर, मेटा ने हटाए 5.4 लाख से ज्यादा अकाउंट

मोदी सरकार के नए मोबाइल सुरक्षा मानकों पर एप्पल-सैमसंग की चिंता

भारत सरकार स्मार्टफोन सुरक्षा को कड़ा करने के लिए नए प्रस्तावों पर विचार कर रही है, जिनमें कंपनियों से सोर्स कोड साझा करने और बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट की अग्रिम जानकारी देने जैसी शर्तें शामिल हैं. हालांकि इन उपायों को लेकर एप्पल, सैमसंग, गूगल और शाओमी जैसी कंपनियों ने कड़ी आपत्ति जताई है, क्योंकि उनका कहना है कि दुनिया के किसी भी देश में ऐसी मांगें नहीं की गईं और इससे उनके गोपनीय तकनीकी विवरणों के उजागर होने का खतरा है.

आईटी मंत्रालय ने कहा है कि उद्योग की "वैध चिंताओं" का समाधान खुले मन से किया जाएगा और फिलहाल इन प्रस्तावों को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. मंत्रालय ने एक अलग बयान में यह भी कहा कि वह मोबाइल सुरक्षा के लिए "उपयुक्त और मजबूत ढांचा" तैयार करने के लिए कंपनियों से परामर्श कर रहा है और सोर्स कोड मांगने की बात को खारिज किया, हालांकि इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया.

क्या आसान होगा एप्पल के लिए भारत में आईफोन का उत्पादन बढ़ाना

प्रस्तावित नियमों में प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स को हटाने की अनुमति, बैकग्राउंड में कैमरा-माइक्रोफोन की एक्सेस रोकने की क्षमता, नियमित मालवेयर स्कैनिंग और एक साल तक फोन लॉग्स रखने जैसी आवश्यकताएं भी शामिल हैं. उद्योग निकाय एमएआईटी का कहना है कि लगातार मालवेयर स्कैनिंग से बैटरी खपत बढ़ेगी और एक साल का लॉग स्टोरेज व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि फोन में इतनी जगह उपलब्ध नहीं होती.

ईरान ने कहा, 'हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार'

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोमवार, 12 जनवरी को कहा है कि इस्लामिक गणराज्य संघर्ष की तलाश में नहीं है, पर यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों द्वारा कोई सैन्य हस्तक्षेप होता है, तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा. अरागची ने जोर देकर कहा कि तेहरान "समान अधिकारों और आपसी सम्मान" के आधार पर वार्ता के लिए भी तैयार है. उन्होंने मौजूदा प्रदर्शनों में हो रही हिंसा के लिए बाहरी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि ये ताकतें अमेरिका को हस्तक्षेप का बहाना देने के लिए हिंसा भड़का रही हैं.

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यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग बंद नहीं करता, तो अमेरिका "कड़े विकल्पों" पर विचार कर सकता है. एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने बातचीत के लिए संपर्क किया है और एक बैठक तय की जा रही है. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो वे बैठक से पहले ही सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं.

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को बताया कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं. उन्होंने स्विट्जरलैंड जैसे पारंपरिक मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों के आदान-प्रदान की बात स्वीकार की, हालांकि उन्होंने ट्रंप के दावों को विरोधाभासी बताया. फिलहाल, ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद प्रदर्शन जारी हैं और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार मरने वालों की संख्या 544 तक पहुंच गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है.

ऑस्ट्रेलिया के नए कानून का असर, मेटा ने हटाए 5.4 लाख से ज्यादा अकाउंट

ऑस्ट्रेलिया में 10 दिसंबर 2025 से लागू हुए नए कानून के पालन में मेटा ने 5,44,052 से अधिक अकाउंट्स को हटा दिया है. यह कानून 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है. मेटा के अनुसार, 4 से 11 दिसंबर के बीच की गई इस कार्रवाई में इंस्टाग्राम से लगभग 3.3 लाख, फेसबुक से 1.7 लाख और थ्रेड्स से करीब 40,000 अकाउंट्स बंद किए गए हैं. नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 275 करोड़ रुपये) तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है.

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ऑस्ट्रेलिया की इस पहल को पूरी दुनिया में सराहा जा रहा है और अब जर्मनी भी इस पर गंभीरता से विचार कर रहा है. जर्मनी के डिजिटल मामलों के मंत्री कार्स्टन वाइल्डबर्गर ने हाल ही में कहा कि वे बच्चों के लिए 16 साल की उम्र की सीमा तय करने के पक्ष में हैं. चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की सरकार ने एक विशेषज्ञ आयोग का गठन किया है, जो 2026 की गर्मियों तक अपनी सिफारिशें देगा. जर्मनी में हुए एक हालिया सर्वे के अनुसार, लगभग 60 फीसदी जनता बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध का समर्थन करती है.

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मेटा का कहना है कि वह कानून का पालन तो कर रहा है, लेकिन केवल 'बैन' लगाना समाधान नहीं है. कंपनी के अनुसार, बिना किसी वैश्विक मानक के उम्र का सटीक सत्यापन करना बेहद मुश्किल है. विशेषज्ञों को डर है कि इस प्रतिबंध के कारण बच्चे डार्क वेब या कम रेगुलेटेड ऐप्स की ओर मुड़ सकते हैं, जहां खतरा और भी अधिक हो सकता है. फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए इतने कड़े कदम उठाए हैं.

मलेशिया और इंडोनेशिया ने मस्क के 'ग्रोक' एआई पर लगाया प्रतिबंध

मलेशिया और इंडोनेशिया दुनिया के पहले ऐसे देश बन गए हैं जिन्होंने इलॉन मस्क के एआई चैटबॉट 'ग्रोक' पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. यह कार्रवाई तब की गई जब पिछले दिनों ग्रोक का उपयोग महिलाओं और बच्चों की न्यूड तस्वीरें बनाने के लिए किया गया. इंडोनेशिया ने शनिवार को और मलेशिया ने रविवार को इस सेवा को ब्लॉक कर दिया.

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एआई तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग ने वैश्विक स्तर पर नियमन की कमी को उजागर किया है. जहां यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और भारत जैसे देशों ने इसकी कड़ी आलोचना की है, वहीं अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत एआई नियमों को सीमित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं. मस्क, जो राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी रहे हैं, ने 2023 में ग्रोक लॉन्च किया था. विवाद बढ़ने पर कंपनी ने इस फीचर को केवल 'पेड' यूजर्स तक सीमित कर दिया था, लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह समाधान पर्याप्त नहीं है.

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ग्रोक के माध्यम से बच्चों की आपत्तिजनक तस्वीरें बनने की पुष्टि होने के बाद यह मामला मानवाधिकार और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर हो गया है. इंडोनेशियाई नियामकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक मस्क की कंपनी 'एक्स' सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं करती, तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा.

डॉनल्ड ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का 'कार्यवाहक राष्ट्रपति' घोषित किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक एडिट की गई तस्वीर साझा की है, जिसमें उन्हें "वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति" बताया गया है. विकिपीडिया पेज की शैली में बनी इस फोटो में ट्रंप को अमेरिका के 45वें और 47वें राष्ट्रपति के साथ-साथ वेनेजुएला का मौजूदा नेता भी दर्शाया गया है. हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय संस्था या विकिपीडिया ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया है.

यह घटनाक्रम अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद सामने आया है. मादुरो को नशीली दवाओं की तस्करी के आरोपों का सामना करने के लिए न्यूयॉर्क ले जाया गया है, जिसे उन्होंने "अपहरण" करार दिया है. रूस, चीन और स्पेन जैसे देशों ने इस अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है.

डॉनल्ड ट्रंप ने राजनीतिक बदलाव के साथ-साथ आर्थिक पुनर्निर्माण की योजना भी पेश की है. उन्होंने अमेरिकी तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक कर वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में 100 अरब डॉलर निवेश करने का आह्वान किया है. ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिकी कंपनियां वहां के जर्जर बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करें ताकि तेल उत्पादन बढ़ाया जा सके. उनका मानना है कि इस कदम से न केवल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था सुधरेगी, बल्कि वैश्विक तेल बाजार पर अमेरिका का नियंत्रण भी मजबूत होगा.

भारत की रूस पर निर्भरता कम करने पर जर्मनी का जोर

जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने 12 जनवरी, को अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की. यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो भारत‑जर्मनी के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर के साथ मेल खाती है. बैठक गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में आयोजित की गई.

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मैर्त्स के बीच व्यापार और निवेश, तकनीक, शिक्षा, स्किल और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई. इसके अलावा रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, हरित और सतत विकास तथा लोगों के बीच संपर्क (पीपल-टू-पीपल टाइज) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और सशक्त बनाने पर भी सहमति बनी.

भारत में जर्मन चांसलर: इन मुद्दों पर बात करेंगे मैर्त्स-मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है. दोनों नेताओं की उपस्थिति में कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनसे तकनीक, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है. इसी दौरान दोनों देशों ने एक इंडिया-जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना भी तय की, जो नवाचार और संयुक्त विकास पर केंद्रित होगा.

वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों नेताओं ने व्यापक चर्चा की. मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर भारत और जर्मनी की सोच समान है और G4 देशों के जरिए यूएनएससी सुधार का प्रयास इसका प्रमाण है. बैठक में यूक्रेन और गाजा संकट का जिक्र हुआ और दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई जारी रखने पर सहमति जताई.

चांसलर मैर्त्स ने कहा कि भारत-जर्मनी साझेदारी का रणनीतिक महत्व लगातार बढ़ रहा है और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने से भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी. प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन पक्ष को रक्षा व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए धन्यवाद दिया और बताया कि दोनों देश रक्षा उद्योगों के बीच सह-विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक साझा रोडमैप पर काम कर रहे हैं.

पीएसएलवी रॉकेट उड़ान पथ से भटका, इसरो ने कहा; डेटा का विश्लेषण जारी

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को सोमवार, 12 जनवरी को तब झटका लगा जब इसरो का PSLV‑C62 मिशन कक्षा में उपग्रह स्थापित करने में विफल रहा. सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ यह मिशन EOS‑N1 (अन्वेषा) समेत 15 सह-उपग्रह लेकर अंतरिक्ष की ओर बढ़ा, लेकिन तीसरे चरण (पीएस3) के अंत में रॉकेट में गंभीर तकनीकी गड़बड़ी देखी गई. इसरो ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि पीएस3 स्टेज के अंत में गंभीर समस्या आई, जिसके कारण मिशन अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया.

इसरो अध्यक्ष डॉ. वी नारायणन ने बताया कि रॉकेट का प्रदर्शन तीसरे चरण तक सामान्य था, लेकिन अंत में वाहन के रोल रेट्स में असामान्य वृद्धि और फ्लाइट पाथ में विचलन दर्ज किया गया. इस विचलन के चलते चौथे चरण में उपग्रहों की योजनाबद्ध तैनाती संभव नहीं हो सकी. उन्होंने कहा कि उपलब्ध डेटा का विश्लेषण जारी है और विस्तृत कारण जल्द साझा किए जाएंगे.

PSLV‑C62 मिशन भारत की 2026 की पहली अंतरिक्ष उड़ान थी और इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के उन्नत निगरानी उपग्रह अन्वेषाको ध्रुवीय सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित करना था. लेकिन तीसरे चरण में उत्पन्न अनियंत्रित गड़बड़ी के कारण प्राथमिक व सह-उपग्रहों के कक्षा में न पहुंच पाने की आशंका गहरा गई है. यह विफलता 2025 के PSLV‑C61 मिशन में आए तकनीकी दोष के बाद इसरो के लिए दूसरी बड़ी चुनौती है.

दिल्ली में कड़ाके की ठंड, न्यूनतम तापमान 3 डिग्री

दिल्ली में सोमवार (12 जनवरी) की सुबह कड़कड़ाती ठंड के साथ हुई, जब कई मौसम स्टेशनों पर न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. यह 2023 के बाद जनवरी का सबसे ठंडा दिन रहा. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 16 जनवरी 2023 को न्यूनतम तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था.

आईएमडी के 8:30 बजे तक के आंकड़ों में सफदरजंग स्टेशन, जो दिल्ली का प्रमुख मौसम स्टेशन है, ने 3.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया, जो सामान्य से 4.2 डिग्री कम था. पालम में 3.3 डिग्री, लोधी रोड पर 3 डिग्री, जबकि रिज क्षेत्र में 4.2 डिग्री और आयानगर में 3.2 डिग्री तापमान दर्ज किया गया. मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक ठंड की लहर जारी रहने का अनुमान जताया है, जबकि अधिकतम तापमान के 19 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है.

इस बीच राजधानी की हवा भी चिंता बढ़ाने वाली रही. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, दिल्ली का समग्र एयर क्वालिटी इंडेक्स 298 रहा, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है. शहर के लगभग 20 मॉनिटरिंग स्टेशनों ने ‘बहुत खराब’ वायु गुणवत्ता दर्ज की, जबकि बाकी ‘खराब’ श्रेणी में रहे. नेहरू नगर में एक्यूआई स्तर 344 रिकॉर्ड किया गया, जो पूरे शहर में सबसे खराब रहा.

इसरो का 2026 का पहला मिशन, 16 उपग्रह लॉन्च किए

भारत ने सोमवार, 12 जनवरी को साल 2026 का अपना पहला अंतरिक्ष मिशन श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV‑C62 रॉकेट का प्रक्षेपण किया. इस मिशन के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह "अन्वेषा’ EOS‑N1 को सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया गया. यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएलआईएल) द्वारा संचालित नौवां वाणिज्यिक पृथ्वी अवलोकन मिशन है.

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इस प्रक्षेपण की खासियत यह रही कि हैदराबाद की निजी कंपनी ध्रुवा स्पेस ने पहली बार एक ही मिशन में सात उपग्रहों का योगदान दिया. कंपनी ने इनमें से चार उपग्रह खुद बनाए-तीन ग्राहकों के लिए और एक अपने उपयोग के लिए. ध्रुवा स्पेस के सह-संस्थापक और सीएफओ चैतन्य डोरा सुरपुरेड्डी के अनुसार, ये उपग्रह लो-डेटा-रेट संचार के लिए बनाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल शौकिया रेडियो ऑपरेटर भी कर सकेंगे.

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जवाहरलाल नेहरू तारामंडल के निदेशक बीआर गुरुप्रसाद ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि यह PSLV का 64वां प्रक्षेपण है और यह वही विश्वसनीय रॉकेट है जिसने चंद्रयान‑1, मंगलयान और आदित्य‑एल1 जैसे मिशनों को भी अंतरिक्ष में पहुंचाया था. इससे पहले 24 दिसंबर को इसरो ने LVM3 रॉकेट के जरिए अमेरिका की एएसटी स्पेसमोबाइल कंपनी के लिए ब्लूबर्ड ब्लॉक‑2 संचार उपग्रह को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया था.

साबरमती आश्रम में मोदी-मैर्त्स की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी पर होगी अहम चर्चा

सोमवार, 12 जनवरी को अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स का गर्मजोशी से स्वागत किया. यह मैर्त्स का पद संभालने के बाद भारत का पहला आधिकारिक दौरा है. दोनों नेताओं ने सबसे पहले साबरमती आश्रम पहुंचकर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की और चांसलर मैर्त्स ने विजिटर्स बुक में अपने विचार दर्ज किए.

इसके बाद दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 में शामिल हुए. इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में उनकी संयुक्त उपस्थिति ने भारत-जर्मनी संबंधों और सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत संदेश दिया. यह दौरा भारत और जर्मनी के बीच 75 वर्ष के राजनयिक संबंधों और 25 वर्ष की रणनीतिक साझेदारी के उत्सव के बीच हो रहा है.

दो दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंचे मैर्त्स 12 से 13 जनवरी तक यहां रहेंगे. गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है, जिसमें व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी. दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श करेंगे.

दौरे के दौरान चांसलर मैर्त्स उद्योग और अनुसंधान संस्थानों का भी दौरा करेंगे, जिनमें बॉश और सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग शामिल हैं. यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय संवाद की निरंतरता को आगे बढ़ाती है और आगामी भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से पहले रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने की उम्मीद है. 13 जनवरी को मैर्त्स, बेंगलुरु में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस में छात्रों से मिलेंगे और एक जर्मन कंपनी के ऑफिस जाएंगे.

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