देश की खबरें | प्रतिबंधित एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं की सूची व्यापक नहीं: सीएसई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने बुधवार को कहा कि एक जुलाई से प्रतिबंधित की जा रहीं एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक (एसयूपी) वस्तुओं की सूची व्यापक नहीं है क्योंकि इसमें बहु-परत पैकेजिंग को शामिल नहीं किया गया है जो प्लास्टिक प्रदूषण संबंधी एक वास्तविक खतरा है।

नयी दिल्ली, 29 जून सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने बुधवार को कहा कि एक जुलाई से प्रतिबंधित की जा रहीं एकल-उपयोग वाली प्लास्टिक (एसयूपी) वस्तुओं की सूची व्यापक नहीं है क्योंकि इसमें बहु-परत पैकेजिंग को शामिल नहीं किया गया है जो प्लास्टिक प्रदूषण संबंधी एक वास्तविक खतरा है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने अगस्त 2021 में एक अधिसूचना में एसयूपी वस्तुओं को "प्लास्टिक की वस्तुओं के रूप में परिभाषित किया था, जिनका निपटान या पुनर्चक्रण करने से पहले एक ही उद्देश्य के लिए एक बार उपयोग किया जाना होता है।’’

अधिसूचना में चयनित एसयूपी वस्तुओं को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की योजना भी सामने रखी गई थी।

एक जुलाई से लागू होने वाले प्रतिबंध में प्लास्टिक कैरी बैग (75 माइक्रोन से कम मोटाई, दिसंबर 2022 में 120 माइक्रोन तक संशोधित), ईयरबड्स, प्लास्टिक क्रॉकरी आइटम (चम्मच, प्लेट, ग्लास), स्ट्रॉ, जैसी वस्तुएं और कुछ प्रकार की प्लास्टिक पैकेजिंग सामग्री शामिल है।

सीएसई की ठोस कचरा प्रबंधन इकाई के कार्यक्रम प्रबंधक सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि प्रतिबंध के साथ मुख्य चिंताओं में से एक यह तथ्य है कि प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची व्यापक नहीं है।

सूची में बहु-परत पैकेजिंग (एमएलपी) शामिल नहीं है। सीएसई के अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि एमएलपी का इस्तेमाल चिप्स से लेकर शैंपू और गुटखा पाउच तक लगभग सभी तेजी से चलने वाली उपभोक्ता वस्तुओं में किया जाता है।

सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा, "जब प्लास्टिक प्रदूषण की बात आती है तो यह (एमएलपी) वास्तविक खतरा है, क्योंकि इन वस्तुओं को एकत्र करना लगभग असंभव है और संसाधित करना बिलकुल असंभव है।"

उन्होंने कहा, "इस पैकेजिंग सामग्री के साथ केवल यही किया जा सकता है कि इसे भस्म करने के लिए सीमेंट संयंत्रों को भेजा जाए।"

सरकार का कहना है कि सभी पैकेजिंग सामग्री को विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) अधिसूचना के हिस्से के रूप में शामिल किया गया है।

इसके तहत जो कंपनियां इस सामग्री का निर्माण या उपभोग करती हैं, उन्हें इसे वापस लेकर पुनर्प्रसंस्करण के लिए भेजने की आवश्यकता होती है और इस बारे में कंपनियों के लिए वार्षिक लक्ष्य तय किया गया है कि कितना संग्रह किया जाना है।

नारायण ने कहा कि यह कागज पर अच्छा लगता है, लेकिन जिस तरह से ईपीआर तैयार किया गया है या उसे लागू किया जा रहा है, उसमें बड़ी समस्याएं हैं।

उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, इस प्लास्टिक सामग्री की मात्रा या कंपनी द्वारा उत्पन्न कचरे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह न केवल स्व-घोषणा पर आधारित है, बल्कि इसकी सटीकता का आकलन करने के लिए सार्वजनिक रूप से कुछ भी उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब है कि प्रत्येक कंपनी के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, वह व्यर्थ है।”

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