कम चर्चित कंपनियों ने ओएनजीसी के 49 तेल, गैस फील्ड हासिल किये
ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने जनवरी में कुल 64 छोटे एवं सीमांत तेल एवं गैस फील्डों की पेशकश में से 50 के लिये बोलियां प्राप्त की थी। कंपनी ने निजी कंपनियों को जोड़कर इन फील्डों से उत्पादन बढ़ाने के लिये बोलियां आमंत्रित की थीं।
नयी दिल्ली, 15 मई दुगान्ता ऑयल एंड गैस और ओड़िशा स्टीवेडोर्स लि. जैसी कम चर्चित कंपनियों ने ओएनजीसी के 49 छोटे एवं सीमांत तेल एवं गैस फील्डों को हासिल किया है। सरकार के निर्देश पर ओएनजीसी ने इन तेल एवं गैस कुओं के लिये बोलियां मंगायी थीं।
ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने जनवरी में कुल 64 छोटे एवं सीमांत तेल एवं गैस फील्डों की पेशकश में से 50 के लिये बोलियां प्राप्त की थी। कंपनी ने निजी कंपनियों को जोड़कर इन फील्डों से उत्पादन बढ़ाने के लिये बोलियां आमंत्रित की थीं।
इनमें से कंपनी ने 49 का आबंटन कर दिया है।
ओएनजीसी ने एक बयान में कहा, ‘‘ओएनजीसी ने सात सफल बोलीदाताओं को 49 सीमांत तेल एवं गैस फील्डों वाले 13 अनुबंध क्षेत्रों में आबंटन नोटिस दिया है।’’
कंपनी ने गुजरात, असम, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 64 फील्डों को एक साथ कर 17 तटीय अनुबंध क्षेत्र में रखा। इनमें संयुक्त रूप से 30 करोड़ टन तेल एवं तेल समतुल्य प्राकृतिक गैस भंडार होने का अनुमान है।
बयान के अनुसार 17 जनवरी को बोली समाप्त होने के समय 12 कंपनियों ने 50 फील्डों के लिये 28 बोलियां लगाईं।
सूत्रों के अनुसार 28 बोलियां 14 संकुलों के लिये प्राप्त हुई थीं। इसमें 50 फील्ड हैं लेकिन 14 फील्डों वाले तीन संकुल के लिये कोई बोली नहीं आयी।
ओएनजीसी ने बयान में कहा, ‘‘निविदा शर्तों के तहत मूल्यांकन की विस्तृत प्रक्रिया के जरिये सात कंपनियों को 13 अनुबंध क्षेत्र दिये गये। जमीन स्तर पर फैले ये क्षेत्र गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और असम में हैं।’’ कंपनी ने इस बारे में और कोई ब्योरा नहीं दिया।
सूत्रों के अनुसार तेल एवं गैस फील्ड हासिल करने वालों में दुगांता ऑयल एंड गैस प्राइवेट लि. और ओड़िशा स्टीवेडोर्स लि. शामिल थी। जहां दुगांता असम और तमिलनाडु के कावेरी बेसिन में एकमात्र बोलीदाता रही वहीं स्टीवेडोर्स ने असम में दो संकुलों के लिये बोलियां लगाईं।
बयान में कहा गया है, ‘‘इन अनुबंध क्षेत्रों के आबंटन से इन छोटे एवं सीमांत फील्डों से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।’’
दुगांता आयल एंड गैस ने चार बोलियां जबकि ओड़िशा स्टीवेडोर्स लि., प्राइसर्व इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लि. और उद्यन ऑयल सॉल्यूश्ंस ने तीन-तीन बोलियां लगाईं।
ओएनजीसी ने सरकार के निर्देश पर इन फील्डों के लिये बोलियां मंगाईं।
सूत्रों के अनुसार सरकार इन फील्डों के विकास को लेकर ओएनजीसी के प्रयासों से खुश नहीं थी। उसका मानना था कि निजी कंपनियों को जोड़कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार ओएनजीसी की इस पेशकश की मुख्य विशेषता में तेल एवं गैस बेचने के लिये संबंधित कंपनियों को पूर्ण रूप से कीमत निर्धारण और उसकी बिक्री प्रतिस्पर्धी माहौल में करने की आजादी है।
ओएनजीसी के अनुसार अनुबंधकर्ताओं का चयन आय हिस्सेदारी के आधार पर किया गया है।
अनुबंध अवधि 15 साल है। इसे 5 साल के लिये बढ़ाने का विकल्प होगा।
ओएनजीसी ने इसमें रुचि रखने वाली उन कंपनियों से उत्पादन बढ़ोतरी अनुबंध (पीईसी) के तहत बोलियां आमंत्रित की थीं जिनके पास उत्पादन बढ़ाने के लिये प्रौद्योगिकी हो।
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