देश की खबरें | विधिक सेवा संस्थाएं जनता में अपने प्रति विश्वास की कमी को पाटें : न्यायमूर्ति ललित

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नयी दिल्ली, 31 जुलाई उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यू यू ललित ने रविवार को कहा कि विधिक सेवा संस्थाओं को जनता में अपने प्रति विश्वास की कमी को पाटना है और इसके लिए एक उन्नत कानूनी सहायता परामर्श प्रणाली तैयार की जा रही है।

न्यायमूर्ति ललित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा संस्थाओं में अपेक्षित क्षमता है, क्योंकि वे कानूनी सहायता सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए देश के 9.5 लाख गांवों तक पहुंच बना चुके हैं।

न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि इन संस्थाओं के पास जबरदस्त क्षमता, ताकत और प्रयास हैं, जिन्हें दिशा देने की जरूरत है तथा जनता के बीच पहुंच बनाने से जुड़ा एक हालिया अभियान देश की हर आत्मा तक पहुंच बनाने में सफल रहा है।

न्यायमूर्ति ललित भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यक जागरूकता पैदा की जा चुकी है और अगला कदम विधिक सहायता सेवाओं की गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए कानूनी मदद देना है।

न्यायमूर्ति ललित ने कहा, “विश्वास की कमी, जो अभी भी मौजूद है, उसे पाटने की जरूरत है। इस कमी को पाटने के लिए कानूनी सहायता परामर्श प्रणाली तैयार की जा रही है, जिसके तहत अधिवक्ता केवल विधिक सहायता से जुड़े पहलुओं से निपटेंगे और इस तरह हम पूरी तरह से इस महान कार्य के लिये समर्पित हो सकेंगे।”

उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए युवा और प्रतिभाशाली वकीलों को जोड़ा जाना चाहिए, ताकि यह प्रणाली व्यवस्था की रीढ़ बने और एक नोडल बिंदु के रूप में कार्य कर सके।

पहली अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति ललित ने नालसा और कानून मंत्रालय के सहयोगात्मक प्रयास की सराहना की, जिसके तहत दोनों टेली-लॉ और न्याय बंधु जैसे मोबाइल ऐप्लिकेशन पर काम करेंगे। ये ऐप विधिक सहायता सलाहकारों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर लगातार नजर रखेंगे और कार्यान्वयन की समस्या को हल करेंगे।

न्यायमूर्ति ललित ने सुझाव दिया कि देश के प्रत्येक विधि कॉलेज को कम से कम तीन तालुका को अपनाना चाहिए और अंतिम वर्ष के विधि छात्रों को पैरा-लीगल स्वयंसेवकों के रूप में नामांकन कराने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

बैठक को संबोधित करते हुए शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने सभी से व्यवस्था के भीतर उपलब्ध उपकरणों की सर्वोच्च क्षमता का इस्तेमाल करने का आग्रह किया।

उन्होंने दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सदस्यों से लीक से हटकर सोचने की आदत विकसित करने की अपील की और कहा कि ऐसा सभी हितधारकों के बीच सक्रिय संवाद के जरिये संभव है।

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