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देश की खबरें | कानूनी विशेषज्ञों ने छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देने के अदालत के फैसले की सराहना की

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देश की खबरें | कानूनी विशेषज्ञों ने छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देने के अदालत के फैसले की सराहना की

नयी दिल्ली, 15 जून कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली दंगों की 'साजिश' संबंधी मामले में तीन छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देकर मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बरकरार रखा है तथा यह राज्य द्वारा अधिकार और कानून के दुरुपयोग पर "गंभीर आरोप" है।

पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह, वरिष्ठ वकील गीता लूथरा और कार्यकर्ता वकील वृंदा ग्रोवर ने फैसले की सराहना की, जिसमें कहा गया है कि राज्य ने असंतोष को दबाने की चिंता में विरोध के अधिकार और आतंकवादी गतिविधि के बीच की रेखा को धुंधला बना दिया है और अगर इस तरह की मानसिकता को बल मिलता है, तो यह "लोकतंत्र के लिए दुखद दिन" होगा।

जयसिंह ने कहा, ‘‘यह फैसला विरोध के अधिकार को बहाल करता है।" वहीं, लूथरा ने कहा कि राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवाद पर काबू के लिए जो कानून बनाए गए हैं, उन्हें इतने हल्के ढंग से लागू नहीं किया जाए।

ग्रोवर ने भी ऐसी ही राय व्यक्त की और कहा कि जमानत आदेश राज्य और उसकी एजेंसियों द्वारा अधिकार और कानून के दुरुपयोग पर "गंभीर आरोप" है।

उल्लेखनीय है कि जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल और देवांगना कालिता तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तनहा को दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को जमानत दे दी। इन लोगों को पिछले साल फरवरी में दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के तहत मई 2020 में गिरफ्तार किया गया था।

जयसिंह ने कहा कि यह फैसला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून के उद्देश्य की एक उपयुक्त व्याख्या है और इससे उस कानून के तहत आरोपी लोगों में से कई को लाभ होगा।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 15, 2021 10:31 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).