देश की खबरें | न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने में कानूनी सहायता की कार्यात्मक भूमिका है : न्यायमूर्ति संजीव खन्ना

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. न्याय प्रणाली को मजबूत करने में कानूनी सहायता की कार्यात्मक भूमिका है और इसे जरूरतमंदों की सहायता से परे समझने की जरूरत है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने सोमवार को यह जानकारी दी। ‘कानूनी सहायता तक पहुंच’ पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि कानून के शासन, न्याय तक पहुंच और गुणवत्तापूर्ण प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है।

नयी दिल्ली, 27 नवंबर न्याय प्रणाली को मजबूत करने में कानूनी सहायता की कार्यात्मक भूमिका है और इसे जरूरतमंदों की सहायता से परे समझने की जरूरत है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने सोमवार को यह जानकारी दी। ‘कानूनी सहायता तक पहुंच’ पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि कानून के शासन, न्याय तक पहुंच और गुणवत्तापूर्ण प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है।

सम्मेलन का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि न्यायपालिका के प्रमुख, कानून और न्याय मंत्रालयों के प्रमुख, कानूनी सहायता निकायों के प्रमुख और ‘ग्लोबल साउथ’ के 70 देशों की नागरिक संस्थाओं के प्रतिनिधि विधिक सहायता के लिये एक समर्पित अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक साथ आए हैं।

‘ग्लोबल साउथ’ का इस्तेमाल उन देशों के लिये किया जाता है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है।

न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, “विधिक सहायता को जरूरतमंदों की मदद से कहीं आगे समझने की जरूरत है। न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में कानूनी सहायता की कार्यात्मक भूमिका है। यह व्यक्तियों को सार्वजनिक संस्थानों के साथ भाग लेने, जुड़ने और सक्रिय तथा समान हितधारक बनने का अधिकार देती है।”

उन्होंने कहा, “भारतीय संविधान सभी नागरिकों को न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए दायित्व राज्य पर डालता है। भारत में, कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 इस बात की रीढ़ है कि कानूनी सहायता की पहुंच और जागरूकता कैसे तैयार की जाती है।”

सम्मेलन की मेजबानी नालसा ने भारत सरकार के सहयोग से और अंतरराष्ट्रीय कानूनी फाउंडेशन (आईएलएफ), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सहयोग से की है।

न्यायमूर्ति खन्ना के अलावा, उद्घाटन सत्र में भारत के प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश व नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय किशन कौल के साथ कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और अन्य लोग भी शामिल हुए।

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