देश की खबरें | वकीलों के संगठन ने उच्च न्यायालयों में महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति का अनुरोध किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्च न्यायापालिका में न्यायाधीशों के पदों पर महिलाओं की भागीदारी महज 11.04 प्रतिशत होने की ओर ध्यान दिलाते हुए वकीलों के एक संगठन ने उच्च न्यायालयों में ‘‘प्रतिभावान’’ वकीलों को न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त करने का अनुरोध किया है।

नयी दिल्ली, छह अप्रैल उच्च न्यायापालिका में न्यायाधीशों के पदों पर महिलाओं की भागीदारी महज 11.04 प्रतिशत होने की ओर ध्यान दिलाते हुए वकीलों के एक संगठन ने उच्च न्यायालयों में ‘‘प्रतिभावान’’ वकीलों को न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त करने का अनुरोध किया है।

सुप्रीम कोर्ट वुमैन लॉयर्स एसोसिसएशन (एससीडब्ल्यूएलए) ने वकील स्नेहा कालिता के जरिए दाखिल एक याचिका में देश में विभिन्न उच्च न्यायालयों में वर्तमान में महिला न्यायाधीशों का एक ब्योरा भी दिया और शीर्ष अदालत से इस मुद्दे पर एक लंबित मामले में पक्षकार बनाने की अनुमति मांगी।

उच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ पीएलआर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम महानदी कोलफिल्ड्स लिमिटेड के एक मामले पर सुनवाई कर रही है। इसमें उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों के मुद्दे पर विचार किया जा रहा है और एससीडब्ल्यूएलए ने मामले में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है।

याचिका में कहा, ‘‘सारणी से स्पष्ट है कि (स्थायी और अतिरिक्त न्यायाधीशों समेत) न्यायाधीशों के 1080 स्वीकृत पद में से केवल 661 न्यायाधीश हैं। इनमें से केवल 73 महिला न्यायाधीश हैं जिससे उनकी हिस्सेदारी 11.04 प्रतिशत है।’’

याचिका में कहा गया है कि आजादी के बाद से 1950 से अब तक उच्चतम न्यायालय में नियुक्त कुल 247 न्यायाधीशों में केवल आठ ही महिला न्यायाधीश रही हैं।

वकीलों के संगठन ने आठों महिला न्यायाधीशों के नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में केवल न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी एकमात्र सेवारत महिला न्यायाधीश हैं।

याचिका में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में वकालत करने वाली प्रतिभावान महिला वकीलों को उच्च न्यायालयों में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त करने के लिए विचार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया।

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