देश की खबरें | वकील ने अकेले वाहन चलाते समय मास्क नहीं पहनने पर चालान करने को दी चुनौती

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 17 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक वकील की उस याचिका पर केन्द्र और आप सरकार से बृहस्पतिवार को जवाब मांगा है जिसमें अकेले गाड़ी चलाने के दौरान मास्क नहीं लगाने पर 500 रुपये का चालान किये जाने को चुनौती दी गई है।

न्यायमूर्ति नवीन चावला ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) और पुलिस को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका रुख पूछा है।

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इस याचिका में चालान को रद्द करने और 500 रुपये वापस लौटाने का आग्रह किया गया है। साथ ही, याचिकाकर्ता के मानसिक उत्पीड़न के लिए 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता सौरभ शर्मा ने दावा किया है कि नौ सितंबर को वह अपनी कार से काम पर जा रहे थे। रास्ते में पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका और मास्क नहीं लगाने की वजह से 500 रुपये का जुर्माना कर दिया, जबकि वह कार में अकेले थे।

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शर्मा की ओर से पेश हुए वकील के सी मित्तल ने दलील दी कि स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना स्पष्ट करती है कि अकेले कार चलाने के दौरान मास्क लगाना अनिवार्य नहीं है।

मंत्रालय की ओर से पेश हुए वकील फरमान अली मैग्रे ने कहा कि उन्हें इस बात की पुष्टि करनी है कि क्या इस प्रकार की अधिसूचना जारी की गई है।

शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि उनका चालान करने वाले अधिकारी उन्हें ऐसा कोई भी कार्यकारी आदेश दिखाने में नाकाम रहे, जिसमें निजी वाहन चलाते समय अकेले होने पर मास्क पहनना अनिवार्य बताया गया हो।

याचिका में कहा गया है कि उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया था, वे चालान पर लिख कर दें कि वह वाहन में अकेले थे, लेकिन अधिकारियों ने उनका यह अनुरोध नहीं माना।

सुनवाई के दौरान मित्तल ने दलील दी कि डीडीएमए के दिशा-निर्देश कहते हैं कि मास्क को सार्वजनिक स्थल पर या कार्य स्थलों पर लगाना चाहिए, न कि निजी गाड़ी में।

डीडीएमए ने दलील दी कि दिशा-निर्देश अप्रैल और जून में जारी किए गए थे जो सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाने को अनिवार्य ठहराते हैं। उच्चतम न्यायालय ने निजी गाड़ी को सार्वजनिक स्थान बताया है।

उसने यह भी कहा कि उसके दिशा-निर्देशों के तहत पहली बार पृथक-वास और मास्क लगाने का नियम तोड़ने पर 500 रुपये का जुर्माना है। इसके बाद हर बार उल्लंघन करने पर 1,000 रुपये का अर्थदंड है।

अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 18 नवंबर को सूचीबद्ध कर दिया।

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