देश की खबरें | जोशीमठ में भूधंसाव प्राकृतिक से ज्यादा परिस्थितिजन्य आपदा : पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा
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गोपेश्वर, 17 जनवरी वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा ने मंगलवार को उत्तराखंड सरकार पर जोशीमठ पर आसन्न खतरे को जानने के बावजूद ‘‘हाथ पर हाथ धरे बैठने’’ का आरोप लगाते हुए कहा कि यह प्राकृतिक से ज्यादा परिस्थितिजन्य आपदा है।
जोशीमठ में आपदा पीड़ितों से मिलने के बाद यहां पत्रकारों से बातचीत में टम्टा ने कहा, ‘‘प्राकृतिक से ज्यादा यह परिस्थितिजन्य आपदा है। जोशीमठ नगर खतरे में है, यह जानते हुए भी हमारा सरकारी-तंत्र हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा।’’
इस संबंध में दशकों पहले गठित मिश्रा समिति का हवाला देते हुए टम्टा ने कहा कि 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जोशीमठ के भूधंसाव को लेकर पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट का पत्र मिलते ही इस क्षेत्र के बचाव के लिए प्रयास शुरू कर दिए थे।
उन्होंने कहा कि मिश्रा समिति की सिफारिशों पर कार्रवाई करते हुए क्षेत्र की संवेदनशीलता के मद्देनजर विष्णु प्रयाग जल विद्युत परियोजना का निर्माण बंद करा दिया गया था जबकि जोशीमठ के निचले हिस्से मारवाड़ी से हेलंग के बीच बनने वाली बाईपास सड़क का निर्माण भी इसी कारण 1991-92 में बंद कराया गया था।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, ‘‘मौजूदा सरकारों ने यहां के खतरों को नजरअंदाज कर विकास के नाम पर विनाशकारी योजनाएं थोपीं जिससे हमारी यह ऐतिहासिक नगरी कराह रही है और उसका नतीजा जोशीमठ के सामान्य और गरीब परिवार भुगत रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि अभी भी समय है और इन घटनाओं से सबक लेकर पहाड़ और यहां के निवासियों के जान-माल की रक्षा के लिए ईमानदारी से प्रयास करने होंगे नहीं तो इस तरह की घटनाएं हर दूसरे शहर और गांव की नियति बन जाएगी।
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