देश की खबरें | पटनीटॉप में जमीन अतिक्रमण : सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर में 11 स्थानों पर छापेमारी की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सीबीआई ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में 11 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें पटनीटॉप विकास प्राधिकरण के कुछ पूर्व सीईओ के आवासीय परिसर भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि उधमपुर जिले के पर्यटन केंद्र में कथित भूमि अतिक्रमण और अवैध निर्माण के सिलसिले में ये छापेमारी हुई हैं।
नयी दिल्ली, चार अगस्त सीबीआई ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में 11 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें पटनीटॉप विकास प्राधिकरण के कुछ पूर्व सीईओ के आवासीय परिसर भी शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि उधमपुर जिले के पर्यटन केंद्र में कथित भूमि अतिक्रमण और अवैध निर्माण के सिलसिले में ये छापेमारी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि जम्मू, उधमपुर और कठुआ जिलों सहित केंद्र शासित प्रदेशों के 11 स्थानों पर नौकरशाहों के आधिकारिक एवं आवासीय परिसरों पर छापेमारी की गई। उन्होंने बताया कि पटनीटॉप विकास प्राधिकरण (पीडीए) के कुछ पूर्व सीईओ -- के. के. गुप्ता, एम. ए. मलिक और एस. एम. साहनी के परिसरों पर भी छापेमारी हुई है।
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उन्होंने कहा कि सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के निर्देशों पर प्रारंभिक जांच की थी, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी ने मामले में पांच और नौकरशाहों के नाम जोड़े हैं जिनमें जम्मू के अतिरिक्त आयुक्त राकेश कुमार सारंगल, संयुक्त परिवहन आयुक्त रमन कुमार केसर, बिक्री कर रिकवरी के उपायुक्त राजेन्द्र सिंह और तत्कालीन निरीक्षक (पीडीए) आविश जसरोतिया और जहीर अब्बास शामिल हैं।
सीबीआई के प्रवक्ता आर. के. गौड़ ने बताया कि इसके अलावा उधमपुर जिले के पटनीटॉप में होटलों, रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस के 58 मालिकों पर भी बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण करने, जमीन का अतिक्रमण करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के निर्देश पर प्रारंभिक जांच पूरी करने के लिए बर्फ और कोविड-19 की स्थिति से जूझते हुए 30 सीबीआई अधिकारियों की टीम ने पटनीटॉप और आसपास के इलाकों में एक महीने से अधिक समय तक डेरा डाला।
उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटा लिए थे। कई अन्य अधिकारियों की भूमिकाओं पर भी एजेंसी की नजर है जिनमें भवन अभियान नियंत्रण प्राधिकरण (बीओसीए) के अधिकारी भी शामिल हैं।
गौड़ ने बताया, ‘‘यह भी आरोप है कि कई होटल, गेस्ट हाउस बिना अनुमति के बनाए गए हैं और पीडीए में पंजीकृत नहीं हैं। यह भी आरोप लगाया गया कि इस तरह के अतिक्रमण की जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। कुछ मामलों में होटलों ने कंपाउंडिंग शुल्क भी जमा नहीं कराए।’’
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