देश की खबरें | संसद की सुरक्षा में चूक: चार आरोपियों के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज, मुख्य साजिशकर्ता की तलाश

नयी दिल्ली, 14 दिसंबर दिल्ली पुलिस ने संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में आतंकवाद निरोधक कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, घटना के मुख्य साजिशकर्ता माने जा रहे ललित झा को पकड़ने के लिए कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

यूएपीए के तहत दर्ज मामले गैर ज़मानती होते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को अब तक किसी भी आतंकी समूह के साथ आरोपियों के संबंध नहीं मिले हैं।

सूत्रों ने कहा कि जांच के दौरान दो और लोगों की भूमिका भी सामने आई है तथा सभी आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत सबकुछ किया।

विशाल शर्मा उर्फ विक्की अब भी हिरासत में है। आरोपी संसद पहुंचने से पहले गुरुग्राम में उसके घर पर ही रुके थे।

गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों-सागर शर्मा (26), मनोरंजन डी (34), अमोल शिंदे (25) और नीलम देवी (37) की चिकित्सीय जांच आधी रात को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों की एक टीम ने की।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि संसद मार्ग थाने में यूएपीए की धारा 16 (आतंकवादी कृत्य) और 18 (साजिश आदि) तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 452 (अनधिकार प्रवेश), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना), 186 (लोकसेवक के सार्वजनिक कार्य निर्वहन में बाधा पहुंचाना) और 353 (लोकसेवक को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

चारों आरोपियों से डिप्लोमेटिक सिक्यूरिटी फोर्सेज़ (डीएसएफ) के चाणक्यपुरी स्थित कार्यालय में पूछताछ की गई। शुरुआत में, नीलम और अमोल को संसद मार्ग थाने ले जाया गया और बाद में, उन्हें डीएसएफ कार्यालय ले जाया गया।

सागर शर्मा और मनोरंजन डी शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए और उन्होंने 'केन' से पीली गैस उड़ाते हुए नारेबाजी की। हालांकि, सांसदों ने उन्हें पकड़ लिया।

लगभग उसी समय संसद भवन के बाहर अमोल शिंदे और नीलम ने केन से लाल और पीले रंग का धुआं फैलाते हुए "तानाशाही नहीं चलेगी" आदि नारे लगाए।

सुरक्षा में चूक की यह घटना 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी के दिन हुई।

इस संबंध में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विशेष प्रकोष्ठ की जांच में दो संगठनों के नाम भी सामने आए हैं और उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपी जांच टीम को एक ही जवाब दे रहे हैं।

अधिकारी ने कहा, "ऐसा लगता है कि उन्होंने पहले से ही तैयारी कर रखी थी कि पकड़े जाने पर पुलिस उनसे पूछताछ करेगी तो उन्हें क्या जवाब देना है।"

बुधवार की घटना को लेकर आठ सुरक्षाकर्मियों को आज निलंबित कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ललित को पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है, जो पेशे से शिक्षक है और उसे सुरक्षा में सेंध लगाने की घटना का मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है।

ललित और अन्य आरोपी क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह से प्रभावित थे तथा ऐसा कृत्य करना चाहते थे जिससे देश का ध्यान उन पर जाए। ललित कोलकाता का निवासी है।

उन्होंने बताया कि सभी छह लोग सोशल मीडिया से संपर्क में आए थे और फिर फेसबुक पर भगत सिंह ‘फैन पेज’ से जुड़े थे।

ललित, सागर और मनोरंजन करीब एक साल पहले मैसूर में मिले थे, जहां उन्होंने संसद में घुसने की साजिश रची थी। बाद में, उन्होंने नीलम और अमोल को भी साजिश में शामिल कर लिया।

अधिकारी ने कहा कि ललित ने अगुवाई की और मनोरंजन को मानसून सत्र के दौरान संसद के सभी प्रवेश द्वारों की रेकी करने (टोह लेने) का निर्देश दिया।

अधिकारी ने कहा, "जुलाई में मनोरंजन दिल्ली आया और एक सांसद के नाम पर जारी आंगतुक पास से संसद के अंदर गया। वहां उसे पता चला कि जूतों की तलाशी नहीं होती है।"

ललित चार अन्य लोगों के साथ बुधवार को संसद पहुंचा। जब उन्हें केवल दो पास मिले, तो ललित ने उन चारों - सागर, मनोरंजन, नीलम और अमोल के मोबाइल फोन अपने साथ ले जाने का फैसला किया।

संसद परिसर के अंदर और बाहर जिन कैन से रंगीन धुआं फैलाया गया था, उन्हें अमोल महाराष्ट्र के कल्याण से लाया था।

ललित की आखिरी लोकेशन राजस्थान-हरियाणा सीमा पर नीमराणा में मिली थी। पुलिस ने पहले कहा था कि सभी पांचों 10 दिसंबर को एकत्र हुए थे और गुरुग्राम में विशाल शर्मा के आवास पर रुके थे।

पुलिस ने बुधवार को कहा था कि आरोपियों ने सुनियोजित, समन्वित, सावधानीपूर्वक रची गई साजिश के जरिए संसद की सुरक्षा में सेंध लगाई।

अधिकारियों के मुताबिक, “पूछताछ में अमोल ने बताया कि वे किसान आंदोलन, मणिपुर संकट, बेरोजगारी जैसे मुद्दों से परेशान थे, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया।”

उन्होंने बताया कि “उनकी विचारधारा एक थी और इसलिए उन्होंने सरकार को संदेश देने का फैसला किया।”

लोकसभा सचिवालय ने संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में आठ कर्मियों को निलंबित कर दिया है।

सूत्रों ने कहा कि बृहस्पतिवार को निलंबित किए गए लोगों की पहचान रामपाल, अरविंद, वीर दास, गणेश, अनिल, प्रदीप, विमित और नरेंद्र के रूप में हुई है।

निलंबित किए गए पुलिसकर्मी संसद भवन की सुरक्षा के लिए प्रतिनियुक्ति पर थे तथा उनका काम आगंतुकों और मीडियाकर्मियों की जांच करना था।

इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ‘‘ये सुरक्षाकर्मी संसद की सुरक्षा के लिए प्रतिनियुक्ति पर थे, लेकिन उनका कैडर नियंत्रण प्राधिकार वह संगठन है जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि लोकसभा सचिवालय।’’

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