देश की खबरें | बिहार में अधिकारियों के सहयोग की कमी से धरोहरों का रखरखाव प्रभावित हो रहा है: अधिकारी

पटना, 24 अक्टूबर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) बिहार में करीब 20 विरासत स्थलों को अपनी पूर्ण देखरेख में नहीं ला पाया है क्योंकि संबंधित अधिकारियों ने अभी तक इन स्थानों पर और आसपास के अतिक्रमणों तथा अनधिकृत निर्माणों को नहीं हटवाया है।

एएसआई (पटना सर्कल) की अधीक्षण पुरातत्वविद गौतमी भट्टाचार्य ने कहा कि जिलाधिकारियों को बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के पैतृक घर सहित कई संरक्षित स्थलों के रखरखाव के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने संरक्षित स्मारकों के आसपास के प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध निर्माण से संबंधित कई पुलिस शिकायतें दर्ज करायीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

भट्टाचार्य ने कहा कि अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माणों को हटाने में जिला प्रशासन की यह उदासीनता इन स्थलों को एएसआई की पूरी निगरानी में लाने में आड़े आ रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में सीवान के जिलाधिकारी को इस तथ्य से अवगत कराने के लिए पत्र लिखा गया था कि परियोजना पर स्थानीय लोगों के एक समूह के विरोध के बाद जिरादेई में डॉ राजेंद्र प्रसाद के घर के जीर्णोद्धार का काम रोकना पड़ा था।

भट्टाचार्य ने कहा कि मामले को स्थानीय पुलिस के संज्ञान में लाने के बावजूद एएसआई साइट प्रभारी वहां काम शुरू नहीं कर सके हैं ।

उन्होंने कहा कि संरक्षित स्थल के चारों ओर जल्द से जल्द चहारदीवारी का निर्माण किया जाना चाहिए और ऐसा नहीं करने पर घर को अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘हम बस स्थानीय अधिकारियों से कुछ संवेदनशीलता और सहयोग चाहते हैं क्योंकि हम इन साइटों की रक्षा, संरक्षण और रखरखाव करने की कोशिश करते हैं।’’ सीवान के जिलाधिकारी अमित कुमार पांडेय ने पीटीआई- को बताया कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं और एएसआई बिना किसी बाधा के जिरादेई में काम शुरू कर सकते हैं।

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