देश की खबरें | भारत में जागरूकता की कमी और परिवार के सदस्यों की अनिच्छा अंगदान में बाधा : विशेषज्ञ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विशेषज्ञों के मुताबिक जागरूकता की कमी और लोगों की परिवार के मृत सदस्य के अंगों को दान करने की अनिच्छा भारत में अंगदान की सबसे बड़ी बाधा है और इसकी वजह से अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

नयी दिल्ली, 12 जून विशेषज्ञों के मुताबिक जागरूकता की कमी और लोगों की परिवार के मृत सदस्य के अंगों को दान करने की अनिच्छा भारत में अंगदान की सबसे बड़ी बाधा है और इसकी वजह से अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

एमजीएम हेल्थकेयर में हृदय विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. के. आर. बालकृष्णन ने कहा कि मौत के बाद परिजन जागरूकता की कमी और उससे जुड़ी भ्रांतियों की वजह से अपने प्रियजन का अंग दान करने के लिए सामने नहीं आते हैं।

डॉ. बालकृष्णन चेन्नई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट ऐंड मेकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट (आईएचएलटीएमसीएस) के निदेशक भी हैं। उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ भारत अंगदान के मामले में अन्य देशों से कहीं पीछे है। इसके प्राथमिक कारणों में एक अंगदान के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है।’’

उन्होंने कहा कि एक मृतक आठ लोगों की जिंदगी बचा सकता है। बालकृष्णन ने कहा कि एमजीएम हेल्थकेयर के आईएचएलटीएमसीएस ने भारत में 600 हृदय और फेफड़ों का प्रत्यारोपण किया है।

उक्त संवाददाता सम्मेलन में अंग प्रत्यारोपण के अनुभव से गुजरने वाले कुछ मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए।

संवाददाता सम्मेलन के दौरान जम्मू के छह वर्षीय एक लड़के के परिवार ने अपना अनुभव साझा किया जिसका हृदय प्रत्यारोपण एमजीएम हेल्थकेयर में किया गया था। परिवार ने बताया कि पिछले साल हृदय संबंधी समस्या और शरीर में सूजन की शिकायत के बाद बच्चे को ले गए थे जहां तीन सप्ताह के इंतजार के बाद उसका सफल हृदय प्रत्यारोपण हुआ और कुछ हफ्तों के बाद उसने सामान्य दिनचर्या शुरू कर दी।

डिपार्टमेंट ऑफ लंग ट्रांसप्लांट एंड इंटरवेंशनल पल्मोनलॉजी के क्लीनिकल निदेशक डॉ. अपर जिंदल ने बताया, ‘‘ फेफड़े का प्रत्यारोपण कराने की सलाह उन मरीजों को दी जाती है जो फेफड़े की बीमारी के आखिरी दौर में होते हैं। यह प्रत्येक मरीज के लिए अहम है कि वह उक्त क्षेत्र के विशेषज्ञ से परामर्श ले और जरूरी इलाज कराए।’’

उन्होंने कहा कि ‘‘इसलिए मरीजों को सलाह देने और उनकी समस्याओं के समाधान में सहायता के लिए हमने 20 अलग-अलग शहरों में नियमित आधार पर फेफड़ा क्लीनिक खोलने की योजना बनाई है।’’

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