देश की खबरें | कुशवाहा ने फिर से जदयू छोड़ी, नयी पार्टी बनाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के महागठबंधन में कथित तौर पर बढ़ते कद से नाराज उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में लौटने के दो साल से भी कम समय में एक बार फिर से इस्तीफा दे दिया और ‘राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता दल’ नामक नए दल के गठन की घोषणा की।

पटना, 20 फरवरी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव के महागठबंधन में कथित तौर पर बढ़ते कद से नाराज उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में लौटने के दो साल से भी कम समय में एक बार फिर से इस्तीफा दे दिया और ‘राष्ट्रीय लोकतांत्रिक जनता दल’ नामक नए दल के गठन की घोषणा की।

वहीं, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने अपनी पार्टी के संसदीय बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष कुशवाहा को ‘‘अति महत्वाकांक्षी’’ करार दिया।

उन्होंने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि उनकी (कुशवाहा) पार्टी के भीतर वापसी का सभी के द्वारा विरोध किया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री के आग्रह पर उनकी जदयू में फिर से वापसी हुई थी और कुशवाहा ने आश्वासन दिया था कि अब ‘‘मैं यहीं जिऊंगा और मरूंगा।’’

कुशवाहा ने यह भी घोषणा की कि वह बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देने के लिए सदन के सभापति से मिलने का समय दिए जाने की मांग करेंगे।

कुशवाहा ने आरोप लगाया कि नीतीश ने यह संकेत देकर कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव महागठबंधन के भावी नेता होंगे, राजनीतिक पूंजी गिरवी रख दी।

हालांकि, ललन ने कहा कि कुशवाहा, जो उस समय राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) के प्रमुख थे, ने 2018 में राजग छोड़ने के बाद राजद के साथ गठबंधन किया था और उन्हें तब तेजस्वी यादव ठीक लग रहे थे।

जदयू प्रमुख ने कुशवाहा के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि पार्टी के वास्तविक नेता नीतीश अब स्वयं निर्णय नहीं लेते बल्कि ‘‘निहित स्वार्थों वाली एक मंडली की सलाह’’ पर काम करते हैं।

ललन ने कहा, ‘‘अगर ऐसा होता तो कुशवाहा 2021 में जदयू में कभी नहीं लौट सकते थे। पार्टी में एक भी व्यक्ति उनकी वापसी के पक्ष में नहीं था क्योंकि सभी उनकी महत्वाकांक्षा को जानते थे जिसके कारण वह पूर्व में भी पार्टी को छोड़ेकर चले गए थे। लेकिन, मुख्यमंत्री ने कुशवाहा की इस घोषणा कि जीना-मरना अब यहीं है, उनपर भरोसा किया।’’

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, ‘‘समस्या यह है कि कुशवाहा अपने लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी से कम कुछ नहीं सोच सकते। इसने उन्हें राजग छोड़ने और राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के साथ अपने अवसरों की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वह वहां भी नहीं रह सके और 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने मायावती की बसपा और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ आनन-फानन में गठबंधन किया क्योंकि ये दल उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने पर सहमत हो गए थे।’’

वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से कुछ समय पहले नरेंद्र मोदी सरकार से इस्तीफा देने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री भाजपा के साथ संभावित पुनर्मिलन के सवाल को टाल गए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बड़े भाई नीतीश कुमार से कुछ सबक सीखा है।’’

कुशवाहा ने यह भी स्वीकार किया कि वह अब जदयू में असंतुष्ट खेमे को एकजुट करने की कोशिश करेंगे।

गौरतलब है कि कुशवाहा ने 2013 में जदयू छोड आरएलएसपी बनायी थी और आठ साल बाद अपने इस दल का जदयू में फिर से विलय कर लिया था।

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