देश की खबरें | कोविड-19: दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2,901 विचाराधीन कैदियों की अंतरिम जमानत 45 दिन बढ़ाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर यहां की जेलों भीड़भाड़ कम करने के लिये मंगलवार को 2,901 विचाराधीन कैदियों की अंतरिम जमानत की अवधि 45 दिन के लिये बढ़ा दी।
नयी दिल्ली, चार अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर यहां की जेलों भीड़भाड़ कम करने के लिये मंगलवार को 2,901 विचाराधीन कैदियों की अंतरिम जमानत की अवधि 45 दिन के लिये बढ़ा दी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति के इस अवलोकन के मद्देनजर यह आदेश जारी किया कि इस वक्त अदालत के सामान्य कामकाज शुरू होने की कोई समय सीमा का अनुमान नहीं किया जा सकता। साथ ही, इस बारे में भी निश्चितता नहीं है कि महामारी का खतरा कब जा कर सामाजिक दूरी में कमी लाने की जरूरत को कम करेगा।
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अदालत ने कहा कि इन विचाराधीन कैदियों की अंतरिम जमानत राहत समाप्त होने की तारीख से पूर्व के समान नियम एवं शर्तों पर 45 दिन के लिये बढ़ाई जाती है।
वीडियो कांफ्रेंस के जरिये सुनवाई करते हुए पीठ ने महानिदेशक (कारागार) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सभी 2,901 विचाराधीन कैदियों को टेलीफोन एवं अन्य उपलब्ध माध्यम से अदालत के आदेश से अवगत कराया जाए।
बहरहाल, अदालत ने अगली सुनवाई के लिये 18 सितंबर की तारीख निर्धारित कर दी।
उल्लेखनीय है कि न्यायाधीश हिमा कोहली की अध्यक्षता वाली समिति ने 31 जुलाई की अपनी बैठक में कहा था कि उसका यह विचार है कि अंतरित जमानत की अवधि बढ़ाने और इसकी सिफारिश करने के लिये एक न्यायिक आदेश की जरूरत होगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने महामारी के मद्देनजर अब तक जमानत पर रिहा किये गये विचाराधीन कैदियों की संख्या और जेल में मौजूद कैदियों की संख्या के बारे में भी पूछा।
दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव कंवल जीत अरोड़ा ने पीठ को बताया कि 30 जुलाई तक कुल 4,439 विचाराधीन कैदियों, दोषियों को अंतरित जमानत या पैरोल या सजा में कमी करते हुए रिहा किया गया तथा करीब 14,000 कैदी अभी जेल में हैं, जबकि जेल की क्षमता 10,026 कैदियों की है।
जेलों में भीड़भाड़ कम करने से पहले यह संख्या 18,000 थी।
इस पर, पीठ ने कहा, ‘‘आप अवश्य ही इसे उच्चाधिकार प्राप्त समिति के संज्ञान में लाएं। ’’
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