देश की खबरें | कोटा के जिलाधिकारी ने कोचिंग छात्रों को लिखा भावनात्मक पत्र: कहा, हम आपके साथ

कोटा(राजस्थान), चार सितंबर देश के कोचिंग केंद्र के रूप में प्रख्यात राजस्थान के कोटा शहर में नीट और जेईई परीक्षा उत्तीर्ण करने के आकांक्षी छात्रों के बीच आत्महत्या की बढ़ती संख्या के बीच जिलाधिकारी ओम प्रकाश बुनकर ने छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए पत्र लिखा है। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि वह और उनकी टीम छात्रों के साथ है।

बुनकर ने रविवार को लिखे प्रेरक पत्र में छात्रों से कहा कि वे नाकामी से हारे नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘अगर एक रास्ता बंद होता है, तो कई अन्य रास्ते खुल जाते हैं जो आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं और मेरी टीम आपके साथ है। आप शहर में अकेले नहीं हैं। मैं हूं ना, मेरे कार्यालय और घर के दरवाजे हर छात्र के लिए हमेशा खुले हैं। संकोच न करें, तनाव साझा करना सीखें, आपके मन में किसी भी तरह का डर या तनाव हो तो मुझसे जरूर साझा करें।’’

जिलाधिकारी ने कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों और पेइंग गेस्ट (पीजी)को उनके पत्र को अपने सूचना पट्ट पर लगाने के निर्देश दिये।

कोटा में हर साल ढाई लाख विद्यार्थी इंजीनियरिंग में प्रवेश के मकसद से संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय अहर्ता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं।

इस साल अबतक सर्वाधिक संख्या में 22 छात्रों ने यहां आत्महत्या की है, जिनमें से दो ने 27 अगस्त को महज कुछ घंटों के अंतराल में आत्महत्या की। पिछले साल 15 छात्रों ने आत्महत्या की थी।

व्यस्त दिनचर्या, कठिन प्रतिस्पर्धा, बेहतर करने का नियमित दबाव, माता-पिता की उम्मीदों का बोझ और घर से दूरी ऐसी समस्याएं हैं, जिनका सामना यहां दूसरे शहरों और देश के अन्य हिस्सों से आकर पढ़ाई करने वाले ज्यादातर छात्र महसूस करते हैं।

अपने पत्र में, कोटा के जिला कलेक्टर ने आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और छात्रों से असफलताओं पर निराश नहीं होने का आग्रह किया।

यहां हाल ही में कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों का जिक्र करते हुए बुनकर ने लिखा, ‘‘आप चले गए, लेकिन जाने से पहले आपको यह सोचना चाहिए था कि आपके माता-पिता का क्या होगा, जो स्वेच्छा से अपना सब कुछ न्योछावर करके आपके सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध थे।’’

उन्होंने अपने पत्र में लिखा, ‘‘अपने सपनों को पूरा करने के लिए इस शहर में आने के पहले ही दिन से आप सभी मेरे परिवार के सदस्य बन गए और मैं लगातार आपकी देखभाल करने और आपको यहां एक खुशहाल वातावरण प्रदान करने का प्रयास कर रहा हूं।’’बुनकर ने कुछ छात्रों के साथ बातचीत के दौरान बिताए हसीन पलों को भी याद किया।

बुनकर ने कहा, ‘‘ आप सभी अपने लक्ष्य को पाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं। यदि एक राह बंद होती है, तो कई अन्य रास्ते भी खुलते हैं जो आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। एक परीक्षा में रैंक कम होने से आप टूट जाते हैं, तनावग्रस्त हो जाते हैं और खुद को एक कमरे में बंद कर लेते हैं एवं सोचते हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता जबकि असफलता, सफलता का पहला सोपान है।’’

जिलाधिकारी ने छात्रों को शहर का भ्रमण करने और विश्राम के लिए उद्यानों और मनोरंजन स्थलों पर जाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया, ‘‘बस एक बार बाहर आएं और देखें कि मेरे शहर में क्या नहीं है, सुंदर नदी तट, चंबल नदी की लहरें, आकर्षक बगीचे और उपवन; हर क्षेत्र आपका स्वागत करने के लिए उत्सुक है।’’

बुनकर ने पत्र में छात्रों को तनाव से दूर रहने और चिंता मुक्त होने के लिए कुछ सुझाव भी दिए। उन्होंने छात्रों से अपनी क्षमता का पता लगाने का भी आह्वान किया क्योंकि उज्ज्वल भविष्य के लिए कई रास्ते हैं।

उन्होंने अपने पत्र का समापन प्रेरक संदेश से करते हुए लिखा, ‘‘प्रिय छात्रों, आप मजबूत हैं, आपके पास जीवन जीने के लिए बहुत कुछ है। आपमें हर कमजोरी और कठिनाई को पार करते हुए आगे बढ़ने का साहस है। यकीन मानिए, कोई भी आपको तब तक नहीं हरा सकता, जब तक आप खुद हार न मान लें।’’

कोटा में छात्रों द्वारा आत्महत्या की घटनाओं में वृद्धि के बाद 2016 में तत्कालीन जिलाधिकारी रवि कुमार सुरपुर ने भी छात्रों के माता-पिता को एक भावनात्मक पत्र लिखा था और उनसे अपने बच्चों पर अपनी उम्मीदों और सपनों का बोझ नहीं डालने की अपील की थी।

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