देश की खबरें | खिचड़ी वितरण घोटाला: बंबई उच्च न्यायालय ने शिवसेना (उबाठा) नेता को जमानत दी

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मुंबई, चार फरवरी बंबई उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान मुंबई में प्रवासी श्रमिकों को ‘खिचड़ी’ के पैकेट वितरित करने में कथित घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में शिवसेना (उबाठा) नेता सूरज चव्हाण को मंगलवार को जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने चव्हाण की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वह एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं और मुकदमे की सुनवाई ‘‘निकट भविष्य में’’ पूरी होने की संभावना नहीं है।

अदालत ने कहा, ‘‘अगर आवेदक की हिरासत आगे भी जारी रहती है तो यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई और निजी स्वतंत्रता की गारंटी के उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।’’

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जनवरी 2024 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी की युवा शाखा ‘युवा सेना’ की कोर कमेटी के सदस्य चव्हाण को गिरफ्तार किया था।

ईडी का धन शोधन का मामला मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के बाद सामने आया है।

ईडी के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने कोविड-19 के कारण लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान मुंबई में फंसे प्रवासी श्रमिकों को खिचड़ी के पैकेट वितरित करने के लिए ‘फोर्स वन मल्टी सर्विसेज’ के बैंक खाते में 8.64 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए।

ईडी ने दावा किया कि यह घोटाला 3.64 करोड़ रुपये का था, जिसमें से 1.25 करोड़ रुपये चव्हाण के बैंक खाते में और 10 लाख रुपये उनकी साझेदारी वाली कंपनी ‘फायर फाइटर्स एंटरप्राइजेज’ के खाते में स्थानांतरित कर दिए गए।

केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस प्रकार चव्हाण ने 1.35 करोड़ रुपये की ‘‘आपराधिक आय’’ अर्जित की जिसका इस्तेमाल उन्होंने संपत्ति खरीदने और डेयरी व्यवसाय में निवेश करने के लिए किया।

आरोपी की ओर से पेश हुए वकील अशोक मुंदरगी ने दलील दी थी कि चव्हाण को मामले में सह-आरोपियों के बयानों के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने कहा कि आरोपी व्यक्तियों के बयानों को गवाह के रूप में इस्तेमाल करना ‘‘केवल आवेदक (चव्हाण) की गिरफ्तारी के लिए जांच का सबसे अनुचित हिस्सा है।’’

वकील ने दावा किया कि आरोपी को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह एक राजनीतिक पदाधिकारी था।

ईडी ने हालांकि दलील दी कि चव्हाण द्वारा अपराध से प्राप्त धन की मात्रा इतनी अधिक है कि वह जमानत के हकदार नहीं हो सकते।

उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि चव्हाण एक साल से अधिक समय से हिरासत में है। अदालत ने कहा कि मामले में संज्ञान लेने के अलावा कोई और प्रगति नहीं हुई है और आरोप अभी तय होने बाकी हैं।

अदालत ने कहा कि ईडी ने अपनी शिकायत में अभियोजन पक्ष के 20 गवाहों का हवाला दिया है और इसलिए यह समझना कठिन होगा कि निकट भविष्य में मुकदमा पूरा होने की संभावना है।

अदालत ने कहा, ‘‘आवेदक ने अभियोजन एजेंसी के साथ पूरा सहयोग किया है और सभी खुलासे किए हैं। इसलिए, उसे आगे भी कैद में रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि यह उसे दोष सिद्ध होने से पहले ही दंडित करने के समान होगा।’’

उच्च न्यायालय ने चव्हाण को एक लाख रुपये की अनंतिम नकद जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया और जेल से रिहा होने के चार सप्ताह के भीतर समान राशि की एक या दो जमानत राशियां जमा करने की भी अनुमति दी।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आरोपी निचली अदालत की पूर्व अनुमति के बिना महाराष्ट्र छोड़कर नहीं जाएगा।

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