देश की खबरें | केरल उच्च न्यायालय ने रेहाना फातिमा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
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कोच्चि, 24 जुलाई केरल उच्च न्यायालय ने विवादित कार्यकर्ता रेहाना फातिमा की अग्रिम जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। उन पर एक वीडियो पोस्ट करने का आरोप है जिसमें उनके नाबालिग बच्चों को उनके अर्द्ध नग्न शरीर पर पेंटिंग करते हुए देखा गया था।
याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि वह याचिकाकर्ता की इस दलील से सहमत नहीं है कि उसे इस तरीके से अपने बच्चों को यौन शिक्षा देनी चाहिए।
इस वीडियो को तर्कसंगत ठहराते हुए कार्यकर्ता ने अपनी जमानत याचिका में कहा कि जहां तक बच्चों का सवाल है तो उन्हें यौन शिक्षा देने की जरूरत है और शरीर तथा उसके अंगों से पहचान कराने की आवश्यकता है ताकि वे इसे अलग तरीके से देख सकें।
न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपने सिद्धांत के अनुसार अपने बच्चों को पढ़ाने की आजादी मिली है लेकिन यह उनके घर की चारदीवारी के भीतर होना चाहिए और कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं होना चाहिए।
फातिमा के खिलाफ आरोप है कि उसने अपने बच्चों 14 साल के बेटे और आठ साल की बेटी से अपने अर्द्ध नग्न शरीर पर पेंट करने के लिए कहा।
वीडियो में वह अर्द्ध नग्न अवस्था में लेटी है और उनके दोनों बच्चे उनके शरीर पर पेंट कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने यह वीडियो बनाई थी और इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
इस वीडियो को देखने के बाद कोच्चि पुलिस के साइबर डोम ने पिछले महीने फातिमा के खिलाफ एक मामला दर्ज किया। उस पर बाल यौन अपराध संरक्षण कानून, 2012 (पोक्सो कानून), सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 और बाल अपराध न्याय कानून, 2015 की विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों का आरोप लगाया गया।
केरल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी महिला के खिलाफ पोक्सो कानून की विभिन्न धाराओं में पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
फातिमा उस समय सुर्खियों में आयी थीं जब उच्चतम न्यायालय द्वारा सितंबर 2018 में सबरीमला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु वाली महिलाओं के प्रवेश को अनुमति दिए जाने के बाद उन्होंने मंदिर में प्रवेश की कोशिश की थी लेकिन हिंदू कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं के विरोध के कारण वह ऐसा नहीं कर पाई।
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